नगर की पुरानी लाइब्रेरी वर्षों से बंद, बुद्धिजीवियों ने आधुनिक सार्वजनिक पुस्तकालय और अध्ययन केंद्र शुरू करने की उठाई मांग।
सांची (रायसेन): रिपोर्ट : नसीम खान
विश्व प्रसिद्ध पर्यटन एवं ऐतिहासिक नगरी सांची अपनी बौद्ध विरासत और सांस्कृतिक महत्व के कारण देश-दुनिया में विशेष पहचान रखती है। हर वर्ष हजारों देशी-विदेशी पर्यटक यहां स्थित स्तूपों और ऐतिहासिक धरोहरों को देखने पहुंचते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि नगर में आज एक भी सक्रिय सार्वजनिक पुस्तकालय उपलब्ध नहीं है। ज्ञान और अध्ययन की परंपरा से जुड़े इस विश्व धरोहर स्थल पर पुस्तकालय जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव स्थानीय नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर में वर्षों पहले संचालित होने वाली सार्वजनिक लाइब्रेरी बंद हो चुकी है, जबकि अधिकांश शासकीय एवं निजी विद्यालयों में भी पुस्तकालय व्यवस्था अब केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
कभी ज्ञान का केंद्र थी सार्वजनिक लाइब्रेरी
जानकारी के अनुसार, पूर्व में नगर परिषद द्वारा स्टेशन रोड पर एक सार्वजनिक पुस्तकालय संचालित किया जाता था। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी, युवा और वरिष्ठ नागरिक समाचार पत्र, पत्रिकाएं और विभिन्न विषयों की पुस्तकें पढ़ने पहुंचते थे।
पुस्तकालय में इतिहास, साहित्य, उपन्यास, प्रतियोगी परीक्षाओं और समसामयिक विषयों से संबंधित सामग्री उपलब्ध रहती थी, जिससे लोगों के ज्ञान में वृद्धि होती थी। हालांकि, समय के साथ यह पुस्तकालय बंद हो गया और इसके दोबारा संचालन के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
विद्यार्थियों की पढ़ने की आदत पर पड़ रहा असर
नगर के शिक्षाविदों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं होते, बल्कि वे समाज में ज्ञान और बौद्धिक विकास के केंद्र के रूप में कार्य करते हैं।
उनका कहना है कि विद्यालयों में पुस्तकालय व्यवस्था कमजोर होने और सार्वजनिक पुस्तकालय के अभाव के कारण विद्यार्थियों की पठन-पाठन की आदत प्रभावित हो रही है। डिजिटल युग में जहां मोबाइल और सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ा है, वहीं पुस्तकें पढ़ने की संस्कृति धीरे-धीरे कम होती जा रही है।
पर्यटकों के लिए भी नहीं है अध्ययन केंद्र
सांची जैसे विश्व धरोहर स्थल पर प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें स्थानीय इतिहास, संस्कृति और बौद्ध धरोहर से संबंधित साहित्य उपलब्ध कराने के लिए कोई सार्वजनिक अध्ययन केंद्र मौजूद नहीं है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नगर में आधुनिक पुस्तकालय स्थापित किया जाए, तो यह न केवल विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी होगा, बल्कि पर्यटकों को भी सांची के इतिहास और सांस्कृतिक महत्व को समझने का अवसर मिलेगा।
बुद्धिजीवियों ने उठाई मांग
स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि बंद पड़ी सार्वजनिक लाइब्रेरी को पुनः प्रारंभ किया जाए या नगर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया सार्वजनिक पुस्तकालय स्थापित किया जाए।
उनका कहना है कि सरकार सांची के पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन ज्ञान और अध्ययन की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी समान रूप से प्रयास किए जाने चाहिए।
निष्कर्ष
विश्व धरोहर सांची की पहचान केवल उसके ऐतिहासिक स्मारकों से नहीं, बल्कि ज्ञान, शिक्षा और संस्कृति से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में नगर में एक आधुनिक सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है। यदि इस दिशा में पहल की जाती है, तो इसका लाभ विद्यार्थियों, शोधार्थियों, स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों सभी को मिलेगा।

