रेत माफिया के गुर्गों का बढा मनोबल, टूटा
4 ट्रैक्टर खनिज विभाग ने पकड़ा

,,जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
दिलेसर चौहान ,,संवाददाता छग,

कलेक्टर कर लेंगे बात कह कर रौब दिखाने वाला, एवं उसके ठेकेदार मदन सेठ, को उस समय झटका लगा जब मीडिया के लोगों ने रेत घाट पर अवैध उत्खनन और गलत परिवहन में मनमानी करने पर उत्खनन विभाग माइनिंग ने छापामार कारवाही कर चार ट्रैक्टरों को जप्त कर लिया।
बिना रॉयल्टी फर्जी रोज होता है, ट्रैक्टर व हाईवा से रेत परिवहन धड़ल्ले से जारी था
रेत खदानों के लिए मशहूर शक्ति जिले के हसौद,
तहसील अंतर्गत ग्राम बरेकेल कला डोटमा में ठेके पर लेकर इन दिनों रेत माफिया धड़ल्ले से रेत खनन का काम कर रहे हैं ।लेकिन ज्यादा से ज्यादा रेट निकाल कर फायदा कमाने के चक्कर में ठेकेदार नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है
इसके बावजूद प्रशासन का कोई अधिकारी डोटमा रेत घाट पर सुध लेने की जरूरत नहीं समझ रहे।
जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते रेत ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं ।


वैद्य रेत उत्खनन अब धीरे-धीरे अवैध रेत उत्खनन की तरफ आगे बढ़ रहा है।
क्योंकि रेट खोदने के लिए उपयोग आने वाली पोकलैंड मशीन लगी हैऔर नदी के भीतर जाकर रेत का उत्खनन कर रही है।
जो नियम के विरुद्ध है साथ ही विना रॉयल्टी पर्ची ,डोटमा रेत खदान से रोजाना सैकड़ों ट्रिप रेट का अवैध परिवहन किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि प्रशासन की नाक के नीचे काम को एक दो जगह नहीं बल्कि नदी के लगभग हर घाट पर चल रहा है।
महानदी पर हसौद सर सीमा पर बरेकेल किकिरदा घाट बसंतपुर घाट पर अवैध उत्खनन जोरों पर है।
सुबह 3:00 बजे से देर रात तक बिना रेल की पर्ची के रेत माफिया के गुर्गे ट्रैक्टर व हाईवा ड्राइवरों से 300 से 2000 तक अवैध वसूली उगाही करते हैं
शासन को करोड़ों का राजस्व की हानि पहुंचा रहे हैं।
लेकिन रेत माफियाओं पर कारवाही नहीं हो पा रही।
वही जब कोई मीडिया कर्मी रेत परिवहन कर रहे इन ट्रैक्टरों को रोककर रायलटी पर्ची के बारे में पूछ ले तो घाट के गुर्गे वहां पहुंचकर मीडिया कर्मियों से अभद्रता कर अलेक्टर कलेक्टर से कर लेंगे बात ,कहते हुए नजर आते हैं ।
गुर्गे के द्वारा क्षेत्र के जिम्मेदारों को बिना रेल्टी पर्ची रेत परिवहन कर रहे ट्रैक्टरों को हाईवा पर कारवाही नहीं करने 70 से 20000 तक कमीशन दिया जाता है ।
अब यह कहां तक सच है यह तो वही जाने पर एक बात तो समझ में आती है।
जब कारवाही करने अधिकारी जाते हैं, तो माफियाओं तक सूचना पहले पहुंच जाती है।
आज कार्यवाही होने वाली है आखिर कैसे? यह सूत्र ऊपर से नीचे तक जुड़ा है ऐसा प्रतीत होता है देखते हैं आगे क्या करवा ही शासन प्रशासन के द्वारा की जाती है।

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