इस स्थल की गड़बड़ाई बिजली व्यवस्था से सारा नगर परेशान ।

नसीम खान संपादक
बिजली से संबंधी सभी व्यवस्थाएं चरमराई।
सांची,,, वैसे तो इस स्थल की पहचान किसी से छिपी नहीं है जहां इस स्थल पर सुविधा उपलब्ध कराने सरकारें कवायद में जुटी हुई है बावजूद इसके इन सब व्यवस्था पर विद्युत वितरण कंपनी पानी फेरने में पीछे नहीं दिखाई दे रही है जिसका खामियाजा न केवल नगर वासियों किसानों मजदूरों व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है बल्कि सरकार की डिजिटल इंडिया पर भी मंडल के लापरवाह अधिकारी पानी फेरने जुटे हुए हैं ।
जानकारी के अनुसार आज कल नगर सहित क्षेत्र भर में विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों के तानाशाह रवैये के चलते सारे क्षेत्र के लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है इस विश्व विख्यात पर्यटक स्थल पर बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है यहां तक कि इस स्थल पर बिजली व्यवस्था सुचारू बनाने बिजली नियामक आयोग तक ने चौबीस घंटे सुचारू बनाने निर्देश जारी किए थे परन्तु इन दिनों बिजली व्यवस्था देखने वाले अधिकारी पूरी तरह तानाशाही रवैया अपना रहे हैं तथा अपने ही नियामक आयोग के आदेश की तो धज्जियां उड़ाते दिख रहे हैं साथ ही इस विख्यात स्थल की सुरक्षा से भी खिलवाड़ खेलते दिखाई दे रहे हैं पूरा नगर बिजली की गड़बड़ाई व्यवस्था से परेशान हो उठा है न तो बिजली का ठिकाना रात में आने का रहता है न ही दिन में ठिकाना जाने का रहता है हालांकि बिजली की चरमराई व्यवस्था के समाचार अखबारों की सुर्खियां बन चुके हैं इस स्थल पर बिजली व्यवस्था सुचारू बनाए रखने अधिकारियों ने तो अपने कानों में रुई भर ली तथा कानों को बंद कर लिया साथ ही आंखों पर भी पट्टी चढ़ा ली ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ इस स्थल सहित क्षेत्र की समस्या हो बल्कि इस गंभीर समस्या पर जिले में बैठे एसी का मज़ा ले रहे मंडल अधिकारियों ने भी चिंता करने की जहमत उठाना छोड़ दिया तब बिजली व्यवस्था के हालात बद से बद्तर हो चुके हैं बावजूद इसके उपभोक्ताओं से बिजली बिलों के नाम पर अनाप-शनाप वसूली का खेल भी किसी से छिपा नहीं रहा मंडल जब बिजली व्यवस्था ही उपलब्ध नहीं करा पाता तब ऐसी स्थिति में बिजली खपत कहां हो जाती है किसी को नहीं पता रहता तथा इसके बाद भी मनमाने बिजली बिल वसूला जाता है ऐसा भी नहीं है कि बिजली व्यवस्था किसानों को ही सुचारू बन रही है परन्तु इस धान के मौसम में जब बिजली की किसानों को जरूरत रहती है तब किसानों को भी बिजली न मिलने का खामियाजा भुगतना पड़ता है जबकि बिजली व्यवस्था सुचारू बनाए रखने किसानों से भी अनाप-शनाप वसूली कर ली जाती है तथा बिजली देने के नाम पर यहां जमे अधिकारी बेखबर बने रहते हैं इस घंटों गायब रहने वाली बिजली से न केवल लोगों को अपने खाने पीने की समस्या से जूझना पड़ता है बल्कि नगर भर में पेयजलापूर्ति पूरी तरह तहस-नहस होकर रह जाती है इतना ही नहीं बिजली की चरमराई व्यवस्था के बावजूद भी मंडल अधिकारी कर्मचारी तथा मंडल के उड़न दस्ते भी बिजली व्यवस्था सुचारू बनाए रखने की परवाह न करते हुए बिना बिजली के ही वसूली में व्यस्त रहते हैं । ऐसा भी नहीं है कि इस ऐतिहासिक स्थली की बिजली की बत्तर स्थिति से जिले के अधिकारी बेखबर हो । जबकि इस स्थल सहित क्षेत्र को मप्र शासन में स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभूराम चौधरी का विधानसभा क्षेत्र माना जाता है तथा डा चौधरी का हर दूसरे दिन आना जाना लगा रहता है परन्तु परन्तु मंडल अधिकारी इस क्षेत्र के मंत्री पर ही भारी पड़ रहे हैं तथा व्यवस्था सुचारू बनाने में नाकाम साबित हो चुके हैं जिससे लोगों के तीज त्यौहार भी मंडल की अव्यवस्थित बिजली व्यवस्था से फीके पड़ जाते हैं। सरकार की डिजिटल इंडिया को भी बिजली पलीता लगाने में पीछे नहीं दिखाई दे रही है बिजली न होने से तमाम कार्यालय में काम काज ठप्प पड़ जाते हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों से आने जाने वाले लोगों को इस का खामियाजा भुगतना पड़ता है इसके साथ ही तमाम बैंकिंग व्यवस्था गड़बड़ा उठती है ।और तो और इस विख्यात स्थल पर मोबाइल कंपनी जो डाटा चार्ज करने के नाम पर अनाप-शनाप वसूली करने में पीछे नहीं दिखाई देती तथा इनकी स्वयं की कोई व्यवस्था नहीं रहती है इन कंपनियों का दारोमदार भी बिजली पर ही टिका होता है जबतक बिजली नहीं तब तक मंहगे से मंहगे मोबाइल भी मात्र बच्चों का खिलौना बंनकर रह जाते हैं तथा मोबाइल कंपनियों का दारोमदार भी बिजली पर ही निर्भर होकर रह गया है बिजली व्यवस्था गड़बड़ाने के साथ ही कंपनी के नेटवर्क भी बन्द हो जाते हैं तब इस स्थल पर आने वाले विदेशी पर्यटकों को खासी परेशानी से जूझना पड़ता है इस स्थल पर बिजली की बागडोर संभालने कुछ दिन पूर्व ही नये जेई मनीष श्रीवास्तव को मंडल ने पदस्थ किया था तब उम्मीद बंधी थी कि शायद बिजली व्यवस्था सुचारू बन जाये परन्तु वह मात्र अपनी औपचारिकता ही इस स्थल पर आकर पूरी कर पाते हैं जब जब बिजली की छिन्न-भिन्न व्यवस्था का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया जाता है तब या तो उनके फोन बंद बताया जाता है अथवा वह किसी का भी फोन उठाने की जहमत नहीं उठा पाते जिससे लोगों में खासा गुस्सा बढ़ता दिखाई दे रहा है यही ढर्रा चलता रहा तो लोगों का ग़ुस्सा आपे से बाहर जाने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। जिसका खामियाजा विद्युत वितरण कंपनी को भुगतना पड़ सकता है।

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