राघवेन्द्र श्रीवास्तव सुल्तानपुर
सुल्तानपुर–नगर का मुख्य बस स्टैंड लंबे समय से नगर के सवारी वाहनों एवं अन्य वाहनों का पार्किंग स्थल मुख्य अड्डा बन गया है, जहां नगर सुल्तानपुर से भोपाल एवं अन्य स्थानों पर जाने वाली बसें नगर के मुख्य बस स्टैंड पर ही खड़ी होती है !
जो बसें अपना अन्यत्र स्थानों पर आने जाने का समय पूरा कर जब नगर में प्रवेश करती हैं तो बस नगर के मुख्य बस स्टैंड पर आकर देर शाम खड़ी हो जाती हैं जो दूसरे दिन तक सुबह अपनी जाने के इंतजार में उक्त स्थान पर ही खड़ी रहती हैं ! साथ ही यह बस अगर दूसरे दिन कोई अवकाश पड़ जाता है जब बसों को अपना आवागमन नहीं करना होता तो यह बस बस स्टैंड पर ही पार्किंग के रूप में खड़ी देखी जा सकती हैं !
और यह स्थिति लगातार लंबे समय से चल रही है, अगर कभी नगर के बस स्टैंड पर कोई कार्यक्रम होना होता है तो घंटों यहां वहां घूम कर बस स्टैंड पर खड़ी बस एवं अन्य वाहनों को हटाने हेतु बस के ड्राइवर कंडक्टर को यहां वहां देखना होता है, जब बे बस के पास आते है तभी बस यहां से हटती है !
नगर सुल्तानपुर में नगर सीमा में 4 पेट्रोल पंप है जिन पर लगभग सभी पेट्रोल पंप पर पर्याप्त जगह व्यवस्था है जहां सवारी वाहन खड़े हो सकते हैं साथ ही अन्य स्थान भी हैं जहां पार्किंग के रूप में बस खड़ी हो सकती हैं लेकिन मुख्य बस स्टैंड पर ही बसों का खड़ा होना नगर की व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है !
बस स्टैंड पर ही दिवस बसेरा एवं पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा की प्रतिमा लगी है–नगर के मुख्य बस स्टैंड पर पर्यटन विभाग द्वारा लाखों रुपए से दिवस बसेरा बनाया गया है जहां मुसाफिरों एवं अन्य राहगीरों को बैठने हेतु व्यवस्था है पर इसके सामने ही बसें खड़ी होने से दिवस बसेरा दिखता नहीं है इसके चलते लाखों का दिवस बसेरा बेकार साबित हो रहा है ! वही प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा की आदम कद प्रतिमा मुख्य बस स्टैंड पर स्थापित है जहां लाखों रुपए खर्च करके विद्युत साज-सज्जा से मंच पर स्वर्गीय पटवा की प्रतिमा स्थापित की गई है पर प्रतिमा के सामने बसों की पार्किंग होने से स्वर्गीय पटवा की मूर्ति भी ढक जाती है जिससे भाजपा द्वारा स्थापित प्रतिमा की सामने बस खड़ी होने से जिस उद्देश्य यह प्रतिमा लगाई गई थी, की बाहर से आने जाने वाले इस प्रतिमा को देखें और स्वर्गीय पटवा को याद करें की स्वर्गीय पटवा का इस क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान रहा है, उन्हीं की वजह से भोजपुर विधानसभा को मध्यप्रदेश में ही नहीं पूरे भारतवर्ष में जाना जाता है, पर भाजपा का यह सपना भी साकार होता नहीं दिख रहा है !
नगर परिषद ने लगाया था 1 हजार जुर्माना का बोर्ड-नगर परिषद सुल्तानपुर द्वारा स्वर्गीय पटवा जी की मूर्ति स्थल पर बस स्टैंड पर वाहन खड़े करने पर ₹1 हजार जुर्माना के साथ सख्त कार्रवाई का बोर्ड लगाया था, जो कुछ दिन मंच पर देखा गया इसके बाद बोर्ड भी गायब है और परिषद की कार्यवाही भी !
लगभग 1 माह तो प्रतिमा के पास यह जुर्माना वाला बोर्ड लगा देखा गया पर इस बोर्ड के लगे होने के बावजूद भी वाहन संचालकों ने अपने बस स्टैंड पर बस खड़े करना बंद नहीं किए, इसी बीच एकाएक बोर्ड भी स्थान से गायब हो गया !
इस तरह नगर परिषद की लचर प्रणाली के चलते वाहन खड़े करने वालों के हौसले बुलंद हैं !
बस स्टैंड को खूबसूरत बनाने का प्रयास नगर परिषद का नाकाम–नगर परिषद सुल्तानपुर द्वारा नगर के मुख्य बस स्टैंड पर स्थित दुकाने खूबसूरत एवं एक जैसी हो इस हेतु नगर परिषद द्वारा सभी दुकानों के आगे डाले गए टीन सेट सभी को बदलकर लाखों रुपए की लागत से एक जैसे सेट लगाए गए हैं जिससे आने जाने वाले राहगीरों मुसाफिरों के लिए नगर सुल्तानपुर का बस स्टैंड एक मिसाल बने पर नगर परिषद की सोच को यहां बस स्टैंड पर वाहन चालक पार्किंग बनाकर ग्रहण लगा रहे हैं !
चाय नाश्ता की होटलें एवं अन्य दुकाने ढकी-नगर के बस स्टैंड पर स्थित चाय नाश्ता की होटलें एवं अन्य दुकाने मुख्य बस स्टैंड पर वाहन खड़े होने से यह सभी दुकाने ढक जाती हैं जिससे राहगीरों मुसाफिरों को नाश्ता पानी एवं अन्य सामान नहीं दिखने से इनको परेशानी का सामना करना पड़ता है !
नगर का एकमात्र सुलभ कंपलेक्स भी ढका-मुख्य बस स्टैंड पर बसो का पार्किंग स्थल बन जाने के कारण नगर का एकमात्र सुलभ कांप्लेक्स का रास्ता रुक जाने के कारण भी राहगीरों मुसाफिरों एवं अन्य लोगों को खासतौर से महिला मुसाफिरों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है, क्योंकि जब तक बस रूकती है इतनी देर में यह स्थान देख नहीं पाता है और बस जाने का समय हो जाता है और लोग बिना शॉपिंग कांप्लेक्स पहुंचे, पुनः सफर करने के लिए बसों में सवार हो जाते हैं !
क्या कहते हैं अधिकारी नगर परिषद अधिकारी अशोक कैथल ने कहा कि यह वाहन हटाने का काम हमारा नहीं है यह तो व्हीकल एक्ट है इसमें कार्रवाई पुलिस वालों की बनती है ! यह काम हमारे कार्य क्षेत्र में नहीं आता !
नसीम खान संपादक






