नसीम खान
सांची,,, वैसे तो इस स्थल की नगर परिषद हमेशा सुर्खियों में रही है अब एक बार फिर कर्मचारियों का मामला गर्माया हुआ है हड़ताली कर्मचारी काम पर लौटे तो आधे कर्मचारियों को काम पर लौटने इंतजार करना पड़ रहा है कर्मचारियों के सामने भरण-पोषण की समस्या खड़ी हो गई है परन्तु न तो प्रशासन कर्मचारियों को काम पर लौटने दे रहा है न ही उन्हें सेवा से पृथक ही कर पा रहा है । इसी मामले को लेकर कर्मचारियों ने अतिरिक्त तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार विगत दिनों प्रदेश भर में कर्मचारियों की हड़ताल पर जाने की तर्ज पर इस विश्व विख्यात स्थल की नगर परिषद कर्मचारियों ने भी अपने अधिकारों को लेकर हड़ताल की थी तब इन कर्मचारियों से अधिकारी जनप्रतिनिधियों ने हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील की थी परन्तु कर्मचारी अपनी मांगों को पूरा करने की मांग पर अडे रहे । इसी बीच तत्कालीन सीएमओ का स्थानांतरण हो गया था तब नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम अहिरवार द्वारा भी कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की थी तब इस समस्या को देखते हुए परिषद की बैठक आयोजित हुई तथा उन्हें चौबीस घंटे में काम पर लौटने की चेतावनी दी गई जिसमें लगभग आधे से कर्मचारी काम पर लौट आए तथा शेष कर्मचारी भी कुछ समय पश्चात अध्यक्ष के आश्वासन पर लोटे परन्तु नगर परिषद प्रशासन द्वारा बाद में लौटे कर्मचारियों को काम पर लेने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि परिषद ने कर्मचारियों को सेवा से पृथक करने का प्रस्ताव पारित किया है ।तब से अब तक यह कर्मचारी अनेक बार अध्यक्ष सहित अधिकारियों से अनुनय-विनय कर चुके परन्तु प्रशासन न तो इन दस कर्मचारियों को काम पर ही ले सका है तथा न ही इन्हें सेवा से पृथक करने की कार्यवाही ही कर सका तथा यह कर्मचारी भटकने पर मजबूर हो चुके हैं इस मामले में कर्मचारियों ने बताया कि हमें न तो अध्यक्ष ही संतुष्ट कर पा रहे हैं न ही सीएमओ की अनुपस्थिति में बुलाई गई परिषद की बैठक का हवाला देकर परिषद ही निर्णय कर पा रही है यह सभी कर्मचारी दैनिक वेतनभोगी है इनमें वाहन चालक एवं जल प्रदाय से संबंधित कर्मचारी शामिल हैं । इसके पूर्व भी परिषद के पारित प्रस्ताव पर तीन कर्मचारी सेवा से पृथक किये गये थे तब नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी एवं बाबू द्वारा पारित प्रस्ताव से कांट-छांट की गई थी तब मामला कलेक्टर तक पहुंच गया था तब कलेक्टर ने कर्मचारियों को हटाना अवैध मानते हुए कर्मचारियों को काम पर रखने के आदेश दिए थे तब भी काफी परिषद चर्चा में रही थी तथा कलेक्टर के आदेश पर कर्मचारियों को पुनः काम पर रखा गया था तथा तब पारित प्रस्ताव को भी निरस्त कर दिया गया था उस समय प्रस्ताव से कांट-छांट करने को मामले में भी उस समय तत्कालीन सीएमओ ने कलेक्टर सहित आयुक्त नगरीय प्रशासन विभाग को प्रस्ताव निरस्त करने पत्र लिखा था । तबसे ही परिषद के निशाने पर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी रहे हैं एक बार फिर हड़ताल से लौटने के नाम पर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को काम से हटाने की कवायद शुरू हो गई है वैसे भी यह चुनावी वर्ष होने के साथ आए दिन कर्मचारियों की मांग प्रदेश के मुख्यमंत्री पूरी कर रहे हैं तथा अनेक सौगातें दे रहे हैं परन्तु इस नगर परिषद में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी जो दस दस पंद्रह पंद्रह साल से सेवा देने में जुटे हैं उन्हें बेरोजगार करने की कवायद जोरशोर से चलाई जा रही है । इस मामले में जब अध्यक्ष पप्पू रेवाराम अहिरवार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि परिषद के निर्णय अनुसार कर्मचारियों को काम पर नहीं रखा जा रहा है इस मामले में हम हाल ही में आये नवागत सीएमओ से चर्चा कर अगली कार्रवाई करेंगे । इस मामले में जब पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष एवं वार्ड नं 1 के पार्षद बलराम मालवीय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जिस दिन परिषद की बैठक आयोजित हुई थी हमने बैठक का बहिष्कार किया था । फिर भी हम कर्मचारियों के मामले में सीएमओ से चर्चा करेंगे।तथा पार्षद विवेक तिवारी एवं पार्षद पति राजू वर्मा का कहना है कि या तो सभी कर्मचारियों को काम पर लिया जाना चाहिए अथवा हड़ताल पर बैठे सभी कर्मचारियों को सेवा से पृथक किया जाना चाहिए इस मामले में अतिरिक्त तहसीलदार श्रीमती नियति साहू ने बताया कि नगर परिषद कर्मचारियों ने आवेदन दिया है कि हड़ताल पर बैठे आधे कर्मचारियों को काम पर नहीं लिया गया है हम सीएमओ को पत्र लिखकर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दे रहे हैं । इससे नगर भर के हालात बद से बद्तर हो रहे हैं ।






