संवाददाता गिरिजाशंकर देवांगन
बसंतपुर बैराज परियोजना से प्रभावित किसानों को 14 साल बाद भी मुआवजा राशि नहीं मिल पाई है। मुआवजा राशि की मांग को लेकर प्रभावित किसानों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। किसान बैराज पर ही बैठकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं
दरअसल के एस के पावर प्लांट द्वारा बम्हनीडीह ब्लाक के बसंतपुर में विगत 14 वर्ष पूर्व किसानों का 30 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर बैराज निर्माण कर वर्धा पावर प्लांट में पानी सप्लाई किया जा रहा है। किसानों का कहना हैं कि उन्हें आज तक मुआवजा राशि नहीं मिला है। बिना मुआवजा राशि दिए ही बैराज में पानी रोका जा रहा है।जिसकी वजह से महानदी के तटीय क्षेत्र के किसान फसल नहीं लगा पा रहे हैं। फसल उत्पादन नहीं कर पाने कि वजह से किसानों की आर्थिक स्थिति दिनों दिन खराब हो रही है। किसानों द्वारा लगातार उच्चाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों,को मामले से अवगत करा रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारी किसानों की समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे है। जिसकी वजह से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नाराज किसानों ने अब आंदोलन का रुख अपनाया है। किसान बैराज के ऊपर ही बैठकर अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे हैं।
25 सुत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन। धरने पर बैठे ग्रामीण।
बसंतपुर के ग्रामीणो द्वारा 25 सुत्रीय मांगों को लेकर विगत दिनों भी गेट के सामने पानी सप्लाई बंद कर धरने पर बैठे थे।तब धरने का उग्र रूप को देखते हुए बिर्रा टी आई तहसीलदार पटवारी,के एस के पावर प्लांट प्रबंधक एवं ग्रामीणो के बीच 25 सुत्रीय मांगों को लेकर लिखित में समझौता हुआ था। जिसमें 8 दिनों में समाधान करने की बात कही गई थी।तब धरना समाप्त कर दिया गया था।
लेकिन जब 8 दिन बीत जाने के बाद भी के एस के पावर प्लांट के प्रबंधक के कान में जूं तक नहीं रेंगा। जिससे ग्रामीण नाराज होकर फिर से पुनः 9 जनवरी से गेट के सामने अपनी 25 सुत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए है। धरने का आज 4 था दिन है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक न तो के एस के पावर प्लांट प्रबंधक द्वारा एवं प्रशासन द्वारा उनकी समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बल्कि पुलिस प्रशासन द्वारा किसानों के ऊपर दबाव बनाकर, डराया, धमकाया जा रहा है और आंदोलन को समाप्त करने को कहा जा रहा है।
जीवनदायिनी महानदी बनी किसानों के लिए आफत।
महानदी बसंतपुर, बिर्रा, देवरहा,सलिहा के साथ आस पास के गांवो के लिए जीवनदायिनी नदी थी। क्षेत्र के किसान गर्मी के दिनो मे सब्जी की खेती करते थे। किसानों एवं गरीब वर्ग के लोगो के लिए सब्जी की खेती कमाई का श्रोत था। लेकिन बैराज बनने के बाद बैराज में पानी रोक दिया जाता है।जिसकी वजह से नदी में लगने वाली फसल अब नहीं लग पा रही है। किसान पिछले 14 वर्षो से अब खेती नहीं कर पा रहे हैं। जिसकी वजह से उन्हें आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। वहीं बैराज में पानी रोकने की वजह से बरसात के दिनो मे उनकी खेत डूबान में आ जाता है। जिसकी वजह से धान की फसलें भी खराब हो जाती है। बाढ़ से हुए नुकसान का भी मुआवजा नहीं मिलता।






