रिपोर्ट: नाजिर अली|live khabar india
लटेरी, विदिशा। कंधे पर स्कूल बैग, हाथ में किताबें और सामने उफनती नदी… यह तस्वीर किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि विदिशा जिले के ग्रामीण इलाके की जमीनी हकीकत है। बारिश के मौसम में जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, तब भी छोटे-छोटे बच्चे पढ़ाई के लिए इसी जोखिम भरे रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।
मामला विदिशा जिले की लटेरी तहसील के ग्राम पंचायत धीरगढ़ अंतर्गत भीलाखेड़ी खुर्द गांव का है। यहां नदी पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चों को भी नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के दिनों में नदी का बहाव तेज होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर खतरा और बढ़ जाता है।
कंधे पर किताबें और सामने उफनती नदी
सामने आई तस्वीरों में छोटे बच्चे स्कूल बैग लेकर नदी पार करते दिखाई दे रहे हैं। किसी के कंधे पर किताबों से भरा बैग है तो कोई तेज बहाव के बीच सावधानी से आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
इन बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन बारिश के दिनों में यही सफर किसी जोखिम से कम नहीं होता।
जिस उम्र में बच्चों को स्कूल की कक्षा में पढ़ाई, खेल और भविष्य के सपनों के बारे में सोचना चाहिए, उसी उम्र में उन्हें रास्ते की सुरक्षा को लेकर जूझना पड़ रहा है।
पहले ट्रॉली, अब नदी की तस्वीर
विदिशा जिले के ग्रामीण इलाकों से बच्चों के स्कूल पहुंचने की मुश्किलों की तस्वीरें पहले भी सामने आती रही हैं।
पहले पलोह डैम से जुड़ी तस्वीरों ने सवाल खड़े किए, इसके बाद नटेरन के संदीपनी विद्यालय तक ट्रॉली से पहुंचते बच्चों की तस्वीरें सामने आईं। अब लटेरी के धीरगढ़ क्षेत्र में नदी पार करते मासूमों की तस्वीरों ने एक बार फिर ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल तो हैं, लेकिन क्या बच्चों के सुरक्षित स्कूल पहुंचने की व्यवस्था भी पर्याप्त है?
बारिश बढ़ते ही बढ़ जाता है खतरा
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने और बहाव तेज होने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। सामान्य दिनों में किसी तरह नदी पार करना संभव हो सकता है, लेकिन तेज बारिश के दौरान यही रास्ता खतरनाक हो जाता है।
ऐसे में अभिभावकों के सामने भी बड़ा सवाल रहता है कि बच्चे पढ़ने के लिए घर से तो निकल रहे हैं, लेकिन क्या वे सुरक्षित स्कूल पहुंचेंगे और वापस घर लौटेंगे?
संभाग आयुक्त के स्कूल निरीक्षण के बीच सामने आई तस्वीर
इस पूरे मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जिस समय ये तस्वीरें सामने आईं, उसी दौरान संभाग आयुक्त विदिशा जिले के स्कूलों का निरीक्षण कर रहे थे।
ऐसे में प्रशासन की स्कूल व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या स्कूलों का निरीक्षण केवल स्कूल भवन, कक्षाओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति तक सीमित है, या फिर बच्चों के स्कूल तक पहुंचने वाले रास्तों और उनकी सुरक्षा की स्थिति भी निरीक्षण का हिस्सा है?
ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्कूल भवन के साथ-साथ सुरक्षित आवागमन भी बेहद जरूरी है।

सवाल सिर्फ पुल का नहीं, बच्चों की सुरक्षा का है
यह मामला केवल एक गांव में पुल नहीं होने का नहीं है। यह सवाल बच्चों की सुरक्षा और उनकी शिक्षा तक सुरक्षित पहुंच का भी है।
एक तरफ बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों को प्रोत्साहित किया जाता है, वहीं दूसरी तरफ यदि स्कूल तक पहुंचने का रास्ता ही जोखिम भरा हो तो शिक्षा की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों की मांग है कि नदी पर सुरक्षित आवागमन की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि बारिश के मौसम में बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल न जाना पड़े।
क्या हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इन तस्वीरों को गंभीरता से लेगा?
क्या बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाने के लिए नदी पर पुल या वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था की जाएगी?
या फिर हर बारिश में ये मासूम इसी तरह उफनती नदी के बीच से स्कूल जाने को मजबूर होते रहेंगे?
कैमरे में कैद ये तस्वीरें सिर्फ भीलाखेड़ी खुर्द की कहानी नहीं हैं। ये ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, सुरक्षित आवागमन और बुनियादी सुविधाओं के बीच मौजूद उस अंतर को सामने लाती हैं, जिस पर अब प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
अब देखना होगा कि इन तस्वीरों के सामने आने के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और इन मासूमों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाने के लिए स्थायी समाधान कब तक सामने आता है।
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