विदिशा के प्रसिद्ध बाड़ वाले गणेश मंदिर की रेलिंग चोरी का दावा जांच में झूठा निकला। पुलिस जांच में मंदिर की पूरी रेलिंग मौके पर लगी मिली। जानिए क्या है पूरा मामला
रिपोर्ट : नाजिर अली |Live khabar India
विदिशा। मध्यप्रदेश की सियासत में हाई प्रोफाइल माने जाने वाले विदिशा से मंदिर की रेलिंग चोरी का एक मामला सामने आया, जिसने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल पैदा कर दी। हालांकि पुलिस और प्रशासनिक जांच के बाद इस मामले की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। जांच में मंदिर की रेलिंग चोरी होने की पुष्टि नहीं हुई और मौके पर पूरी रेलिंग लगी हुई पाई गई।
मामला विदिशा के प्रसिद्ध बाड़ वाले गणेश मंदिर से जुड़ा है। यह मंदिर लंबे समय से धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक चर्चाओं का भी केंद्र रहा है। मंदिर को मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से जोड़कर भी देखा जाता है।
सोशल मीडिया वीडियो से शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के एक वीडियो से हुई। वीडियो में मंदिर की रेलिंग चोरी होने की बात कही गई थी। साथ ही ई-मेल के माध्यम से शिकायत किए जाने की बात भी सामने आई।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विदिशा में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। लोगों के बीच यह चर्चा होने लगी कि आखिर मंदिर की रेलिंग चोरी कैसे हो गई और इस मामले को सोशल मीडिया के जरिए क्यों उठाया गया।
मंदिर का राजनीतिक महत्व देखते हुए मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।
पुलिस अधीक्षक ने लिया संज्ञान
मामला सामने आने के बाद विदिशा पुलिस अधीक्षक रोहित कासवानी ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक कार्रवाई की।
जांच के दौरान मौके का निरीक्षण किया गया और पंचनामा तैयार किया गया। पुलिस ने मंदिर से जुड़े लोगों और जिम्मेदार अधिकारियों से भी जानकारी ली।
जांच के बाद जो स्थिति सामने आई, उसने रेलिंग चोरी के पूरे दावे पर ही सवाल खड़े कर दिए।
मंदिर में लगी मिली पूरी रेलिंग
पुलिस जांच के मुताबिक मंदिर में रेलिंग मौजूद थी। मौके पर रेलिंग लगी हुई मिली और चोरी की घटना की पुष्टि नहीं हुई।
इस तरह सोशल मीडिया वीडियो में जिस रेलिंग के चोरी होने का दावा किया गया था, पुलिस की जांच में वैसी कोई चोरी सामने नहीं आई।
सीएसपी अतुल तिवारी ने भी मामले में पुलिस जांच के संबंध में जानकारी दी।
मंदिर के पुजारी ने भी आरोपों को बताया निराधार
मंदिर की वर्षों से देखरेख कर रहे पुजारी और महंत भी मामले को लेकर सामने आए। मंदिर के पुजारी परसराम चौबे ने रेलिंग चोरी की बात को निराधार बताया।
उनका कहना है कि मंदिर से रेलिंग चोरी होने की कोई घटना नहीं हुई। साथ ही उनकी ओर से इस संबंध में कोई शिकायत भी नहीं की गई थी।
सहायक सचिव की रिपोर्ट में भी नहीं मिली चोरी
मामले में सहायक सचिव यशवंत मीणा की रिपोर्ट भी सामने आई। रिपोर्ट में मंदिर से रेलिंग चोरी होने की बात को गलत बताया गया।
इस रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए दावे और मौके की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर साफ नजर आया।
विदिशा की सियासत में क्यों महत्वपूर्ण है यह मंदिर?
बाड़ वाला गणेश मंदिर विदिशा का जाना-पहचाना धार्मिक स्थल है। मंदिर को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से
राजनीतिक चर्चाएं भी होती रही हैं।
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का विदिशा से गहरा राजनीतिक संबंध रहा है। यही वजह है कि उनके गृह जिले में स्थित इस मंदिर से जुड़ा कोई भी मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाता है।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच रेलिंग चोरी का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
अब सवाल वीडियो के दावे पर
पुलिस जांच में रेलिंग चोरी की पुष्टि नहीं होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सोशल मीडिया पर रेलिंग चोरी का दावा किस आधार पर किया गया?
क्या वीडियो बनाने से पहले मौके की स्थिति की सही तरीके से जांच की गई थी? अगर मंदिर में रेलिंग मौजूद थी, तो चोरी का दावा कैसे सामने आया?
फिलहाल पुलिस और प्रशासन की रिपोर्ट के बाद मामला एक अलग मोड़ पर पहुंच गया है।
राजनीतिक विवाद भी हुआ तेज
इस पूरे घटनाक्रम ने विदिशा की राजनीति में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान और नेताओं के बीच मतभेदों की चर्चाओं को हवा दे दी है। भाजपा लगातार संगठन में एकजुटता का संदेश देती रही है, लेकिन विदिशा में समय-समय पर सामने आने वाले विवाद राजनीतिक चर्चाओं को जन्म देते रहे हैं।
हालांकि इस मामले को सीधे किसी राजनीतिक गुटबाजी से जोड़ना उचित नहीं होगा, लेकिन इतना जरूर है कि मंदिर से जुड़ा यह प्रकरण अब धार्मिक मामले से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।
आगे क्या?
अब निगाहें इस बात पर हैं कि मंदिर की रेलिंग चोरी का दावा करने वाले पक्ष की ओर से पुलिस जांच के बाद क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।
फिलहाल पुलिस जांच, मंदिर के पुजारी के बयान और सहायक सचिव की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर की रेलिंग चोरी होने की पुष्टि नहीं हुई है।





