अधिकारियों की लापरवाही से उजड़ने की कगार पर शासकीय उद्यान।ऐतिहासिक सांची में हरियाली बिखेरने वाला उद्यान आज बदहाली में, व्यवस्था भगवान भरोसे

नसीमखान सांची
सांची,, विश्व विरासत स्थल सांची में वर्षों से मौजूद शासकीय उद्यान आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। कभी हरियाली की चादर ओढ़े रहने वाला यह उद्यान देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है, परंतु अब जिम्मेदार अधिकारियों की उपेक्षा इसे उजड़ने की कगार तक ले आई है।
जानकारी के अनुसार उद्यान में लगभग छह दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी तैनात हैं, जिन पर सरकारी राशि व्यय तो हो रही है, परंतु अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण इन्हें दिशा-निर्देश देने वाला कोई नहीं दिखता। स्थाई प्रभारी अधिकारी के अवकाश पर जाने के बाद उद्यान की जिम्मेदारी फील्ड अधिकारी वर्षा निगम को सौंपी गई है, लेकिन उनका भोपाल में अधिक समय व्यतीत होने से उद्यान की देखरेख पूरी तरह ठप पड़ी है।
करीब 11 एकड़ क्षेत्र में फैले इस उद्यान का आधा हिस्सा पूर्व में पर्यटन विभाग को सौंपा जा चुका है। शेष बचे क्षेत्रफल में भी पिछले तीन वर्षों से जुताई-सिंचाई नहीं होने के कारण जगह-जगह कचरा और सूखी लकड़ियों के ठूंठ नजर आते हैं। हालात यह हैं कि यहां लगे सैकड़ों पेड़–पौधे पानी के अभाव में सूखने की कगार पर पहुँच गए हैं।
किसानों के हित में चलाई जाने वाली कई योजनाएँ इसी उद्यान के माध्यम से क्रियान्वित होती हैं, परंतु अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसान खाली हाथ लौटने को मजबूर हो रहे हैं। विभागीय अधिकारी भी इस बदहाल स्थिति पर आँखें मूँदे बैठे हैं।
प्रभारी अधिकारी का पक्ष
फील्ड अधिकारी वर्षा निगम ने कहा कि “हम फील्ड कार्य में व्यस्त हैं। इस समय मुड़िया खेड़ा क्षेत्र में रेलवे लाइन के लिए वृक्षों की गणना कर रहे हैं। हमारा ट्रैक्टर सिलवानी में है। हमने स्थायी रूप से छोटा ट्रैक्टर उपलब्ध कराने की मांग की है ताकि उद्यान की व्यवस्था सुधारी जा सके।”
उद्यान की उपेक्षा को देखते हुए स्थानीय जनों में आशंका है कि कहीं भूमाफिया की नजर इस बेशकीमती भूमि पर न पड़ गई हो। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इस ऐतिहासिक स्थल से ‘शासकीय उद्यान’ का नाम तक मिट सकता है।
अगर जिम्मेदार नहीं जागे, तो शासकीय उद्यान का अस्तित्व इतिहास बन जायेगा।

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