ऐतिहासिक सांची में सर्किट हाउस की मांग फिर जोर पकड़ने लगी

नसीमखान सांची

सांची,, विश्व धरोहर स्थल सांची में एक बार फिर सर्किट हाउस की मांग जोर पकड़ने लगी है। नगरवासियों का कहना है कि पूर्व में यहां सर्किट हाउस और रेस्ट हाउस दोनों मौजूद थे, जो स्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए उपयोगी सिद्ध होते थे। परंतु पर्यटन विभाग को सौंपे जाने के बाद यह दोनों भवन अपने मूल स्वरूप में नहीं रहे।
जानकारी के अनुसार, अंग्रेजी शासनकाल में रेस्ट हाउस में पुरातत्व विभाग के अधिकारी ठहरते थे और स्तूपों के पुनर्निर्माण की योजनाएं तैयार करते थे। वहीं सर्किट हाउस नवाबी दौर का माना जाता था, जहां देश-विदेश के अनेक विशिष्ट व्यक्तित्वों सहित देश के प्रथम प्रधानमंत्री तक ठहर चुके थे। बाद में रेस्ट हाउस को पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन लेकर इसका संरक्षण किया और उसे मार्शल हाउस में बदल दिया, जो अब संग्रहालय परिसर में पर्यटकों को आकर्षित करता है। लेकिन सर्किट हाउस को पर्यटन विभाग ने अपने अधीन लेकर थीम पार्क का हिस्सा बना दिया, जिससे स्थानीय रोजगार और प्रशासनिक सुविधा दोनों प्रभावित हुए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब भी कोई विशिष्ट अथवा अतिविशिष्ट मेहमान सांची आते हैं, तो जिले के अधिकारियों को भोपाल या मुख्यालय से व्यवस्था करनी पड़ती है। इससे शासन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है, जबकि पहले अधिकारी यहीं सर्किट हाउस में रुककर तैयारियां करते थे।
साल 2021 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री और वर्तमान विधायक डॉ. प्रभूराम चौधरी के सामने कलेक्टर ने यहां कैफेटेरिया को सर्किट हाउस घोषित करने की घोषणा की थी। उस समय नगरवासियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से इसका स्वागत भी किया, लेकिन घोषणा आज तक अमल में नहीं आ सकी।
अब नगर के जनप्रतिनिधि और समाजसेवी फिर से इस मांग को उठा रहे हैं।
क्या कहते हैं लोग।
“यह स्थल विश्वविख्यात है, यहां सर्किट हाउस होना जरूरी है। प्रशासन तुरंत व्यवस्था करे।” — पप्पू रेवाराम, अध्यक्ष, नगर परिषद सांची
“पूर्व में यहां दो रेस्ट हाउस थे, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों को लाभ मिलता था। कलेक्टर की घोषणा अधूरी रह गई, अब जिला प्रशासन सर्किट हाउस उपलब्ध कराए।” — कमलकिशोर पटेल, समाजसेवी
“सर्किट हाउस की मांग पुरानी है, घोषणा से उम्मीद जगी थी लेकिन पूरी नहीं हो सकी।” — देवेंद्र तिवारी, व्यवसायी
“यहां सर्किट हाउस होने से अधिकारी रुककर जनसमस्याओं का निराकरण आसानी से कर पाएंगे। विधायक महोदय को अवगत कराकर इस मांग को पूरा कराने का प्रयास करेंगे।” — संजीत पटेल, विधायक प्रतिनिधि

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