नसीम खान
सांची,,,मन, वचन और कर्म में एकरूपता रखना ही उत्तम सत्य धर्म है। स्थानीय श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी में चल रहे दशलक्षण पर्यूषण महापर्व के पांचवें दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ उत्तम सत्य धर्म की आराधना की गई।
जिनालय में प्रातःकाल श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान का सामूहिक अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इस अवसर पर हुई शांतिधारा की बोलियों में सर्वोच्च बोली लेने का सौभाग्य मनोज भैयालाल जैन गुलगांव और अतिशय संदीप जैन सांची को प्राप्त हुआ, जिसकी उपस्थित सभी धर्मावलंबियों ने अनुमोदना की।
दोपहर में राजमल गौरीशंकर जैन गुलगांव, आनंद अंकित जैन, पदम जैन, प्रिंस जैन सांची तथा धर्मेंद्र जैन आमखेड़ा द्वारा मंदिर जी में शांति विधान का आयोजन किया गया।
पर्यूषण पर्व के अवसर पर बेंगलुरु से पधारी समाज सेविका श्रीमती सुधा जैन ने अपने प्रवचन में उत्तम सत्य धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रत्येक जीव का जीवन सत्य पर ही टिका है। सत्य का अर्थ केवल सच बोलना ही नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से सत्य का आचरण करना भी है।
उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि युधिष्ठिर सत्य के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने सत्य से समझौता न करते हुए उसे आत्मसात किया और महान बने।
सुधा जैन द्वारा प्रतिदिन रात्रि में आरती के पश्चात समाजजनों के बीच भजन अंताक्षरी, तंबोला एवं धार्मिक जानकारी से संबंधित प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जा रहा है।
इस अवसर पर सुनील जैन, रश्मि विजय जैन, गोपाल जैन, सोनू जैन, रचना जैन, निर्मला जैन, अल्पना जैन, वर्षा जैन, पुष्पलता जैन, अनीता जैन, ममता जैन, रश्मि राजमल जैन, महिल जैन, हिमांशु जैन, गोरेलाल जैन, सुशील जैन, विक्की जैन तथा सत्यम जैन सहित बड़ी संख्या में धर्मावलंबी उपस्थित रहे।





