रातापानी अभ्यारण की मुंदती हुई आंखें-उघता हुआ प्रशासन

राघवेन्द्र श्रीवास्तव सुल्तानपुर

सुल्तानपुर, नेशनल नेशनल हाईवे क्रमांक 45 से लगा हुआ रातापानी अभ्यारण मध्य प्रदेश के नक्शे पर अपनी अलग ही पहचान लिए है जहां विशालकाय सागोन के वृक्ष जंगली जानवरों की गूंज की आवाज रातापानी अभ्यारण की मौजूदगी का एहसास कराती है, यही सब कुछ रातापानी अभ्यारण की पहचान मानी जाती है, आज यही आवाज टूटती नजर आ रही है, विभागों की उदासीनता एवं जिम्मेदारों की लापरवाही से रातापानी अभ्यारण अब सिर्फ कागजों में ही दिखता नजर आने लगा है !

नगर सुल्तानपुर के वन विभाग के अंतर्गत विनेका वन परीक्षेत्र में रातापानी अभ्यारण आता है वहीं कुछ क्षेत्र तहसील सुल्तानपुर के अंतर्गत राजस्व अमले में आता है ! दो-दो विभागों की मौजूदगी के बाद भी विशालकाय सागोन के कटते वृक्ष विभाग की उदासीनता को दर्शाते हैं ! देखते ही देखते यह विशालकाय जंगल अब खेतों में तब्दील होते दिखने लगा हैं !

जहां रातापानी अभ्यारण क्षेत्र में कील ठोकना भी शासन की निगाह में जुर्म है वही शासन की थोड़ी बहुत जरूरी काम की मंजूरी के चलते अब रातापानी अभ्यारण क्षेत्र में पक्के मकान, एवं खेती के नाम पर किए गए बोर लहलहाते जंगल के लिए चैलेंज बन गए हैं! आज रातापानी अभ्यारण का लहलहाता जंगल खेतों में तब्दील होता दिख रहा है !

जहा सूरज समय से पहले डूबता है और समय से पहले ऊगता है–रातापानी अभ्यारण क्षेत्र ईतना घना क्षेत्र है कि यहां समय से पहले सूरज मानो डूब जाता है और समय से पहले ऊग जाता है क्योंकि विशालकाय सागोन के वृक्ष जो इतने मोटे और लंबे हैं कि इनकी लंबाई और मोटाई का अनुमान नहीं लगाया जा सकता, जंगल इतना घना की 10 फीट लगभग के बाद आगे देखना बंद हो जाता हो वहां शाम 4:00 बजे से दिन डूब जाता है और सुबह 5:00 बजे के लगभग सूरज निकल आता है ! ऐसा विशालकाय जंगल लोगों के निजी स्वार्थ के बीच खेतों में तब्दील होता दिख रहा है, जहां कभी दूर-दूर तक खाली जगह दिखाई नहीं देती थी आज उसी बीयाबान जंगल में चारों ओर विशालकाय वृक्ष नाम मात्र के दिखाई देते हैं! जहां कभी जंगली जानवरों के चलते निकलना मुश्किल होता था, आज इसी जंगल के बीच जंगली जानवर देखना मुश्किल होता है ! और यह सब हो पा रहा है विभागों की उदासीनता से जहां वन विभाग कटते जंगल की सीमा को राजस्व की बताता है तो कभी राजस्व वन विभाग की या निजी जमीनों कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता है ! इस तरह बरसों पुरानी संपदा रातापानी अभ्यारण सरकारी तंत्र की विफलता के चलते जमी दोज होता दिख रहा है !
कटते जंगल का सबूत वन विभाग के बने जूते करती जंगल की गवाही देते नजर आते हैं !
समय रहती इस क्षेत्र में अगर ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले समय में रातापानी अभ्यारण मात्र कागजों में ही नजर आएगा ! इस बरसों पुरानी संपदा को बचाने एवं सावरने हेतु सभी को आगे आना पड़ेगा इसमें क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं सरकारी तंत्र का आगे आना बहुत जरूरी होगा ! जिससे यह रातापानी अभ्यारण कागजों में नहीं जैसा विशालकाय देखा और सोचा जाता है वैसा ही धरातल पर नजर आए !

क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि-ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जयंत कुमार दुबे ने कहा कि रातापानी अभ्यारण क्षेत्र हमारी तहसील सुल्तानपुर की अनोखी संपदा है जो प्रदेश सहित अन्य प्रांतों में भी अपनी जगह बनाए हैं इसे बचाने ,सावरने हेतु हर संभव प्रयास किए जाएंगे ! अगर इस क्षेत्र में अवैध कटाई चल रही है तो वन विभाग को ठोस कदम उठाना चाहिए !

तहसील किसान संघ के अध्यक्ष सचिन पटेल ने कहा कि रातापानी अभ्यारण क्षेत्र हमारे क्षेत्र की बहुमूल्य संपदा है इसे सवारने बचाने हर संभव प्रयास किए जाएंगे इस संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा ! इसको बचाने तहसील किसान संघ हर संभव मदद करने तैयार है अगर हमें इसको बचाने आंदोलन करना पड़ेगा तो भी हम तैयार हैं !

विनेका वन परीक्षेत्र अधिकारी टी. आर. कुलस्ते -ने कहा कि रातापानी अभ्यारण क्षेत्र में कहीं कटाई चल रही है ऐसी मुझे कोई जानकारी नहीं है, अगर कटाई हुई भी है तो वह क्षेत्र राजस्व में आता है वन विभाग में नहीं!

तहसील सुल्तानपुर हल्का पटवारी खपरिया खापा-कैलाश चौधरी ने बताया कि यह क्षेत्र राजस्व में नहीं आता लगभग वन विभाग का क्षेत्र है और कहीं-कहीं निजी भूमि भी है वह लोग समय रहते आबाद कर रहे हैं मैं जाकर देखता हूं !
प्रभारी तहसीलदार पलकपईडइहआ ने कहा कि यह क्षेत्र वन विभाग में आता है, और जानकारी पटवारी से लेकर बताती हूं

नसीम खान संपादक

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