हलाली डैम से उड़ी उम्मीद की उड़ान: मध्यप्रदेश बना देश का ‘गिद्ध राज्य’मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रायसेन में 5 लुप्तप्राय गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा, उपग्रह टेलीमेट्री से होगी निगरानी

नसीमखान सांची
सांची,,, आज हलाली डैम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के पाँच गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में मुक्त किया। इनमें चार भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर) और एक सिनेरियस गिद्ध (ब्लैक वल्चर) शामिल है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कार्य हो रहे हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में ‘प्रकृति के सफाईकर्मी’ के रूप में गिद्धों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका संरक्षण जैव विविधता की रक्षा और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण हेतु निरंतर और वैज्ञानिक प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक आवास में छोड़े गए इन गिद्धों पर जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं, जिससे उनके आवागमन, व्यवहार और सुरक्षा की सतत निगरानी की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि एशिया से विलुप्त हो रहे चीतों के पुनर्वास की तरह गिद्ध संरक्षण भी प्रदेश की प्राथमिकता में शामिल है।
इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) शुभरंजन सेन ने जानकारी दी कि उच्च परिशुद्धता वाले जीपीएस-जीएसएम उपग्रह ट्रांसमीटरों से सुसज्जित इन गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया गया है। टैगिंग प्रक्रिया वन विभाग एवं संबंधित संस्थाओं की उपस्थिति में विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की देखरेख में संपन्न हुई।
उन्होंने बताया कि भारतीय गिद्ध सामान्यतः सीमित क्षेत्र में निवास करते हैं, जबकि सिनेरियस गिद्ध ‘मध्य एशियाई फ्लाईवे’ के अंतर्गत लंबी दूरी का प्रवास करते हैं, जो 30 से अधिक देशों तक फैला प्रमुख प्रवासी पक्षी गलियारा है।
पर्यावरणीय संतुलन के प्रहरी
गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र में मृत पशुओं का शीघ्र निस्तारण कर संक्रमण और बीमारियों के प्रसार को रोकते हैं। मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है। प्रदेश में भारतीय गिद्ध, सिनेरियस गिद्ध, मिस्र गिद्ध तथा हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
देश का अग्रणी ‘गिद्ध राज्य’ मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का अग्रणी “गिद्ध राज्य” है। वर्ष 2025 की गणना के अनुसार प्रदेश में गिद्धों की संख्या 12,710 दर्ज की गई। यह उपलब्धि राज्य सरकार के दूरदर्शी नेतृत्व और वैज्ञानिक संरक्षण रणनीतियों का परिणाम है।
उपग्रह टेलीमेट्री से सशक्त संरक्षण
मध्यप्रदेश वन विभाग ने WWF-India तथा Bombay Natural History Society के सहयोग से गिद्धों की गतिविधियों की निगरानी हेतु उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम प्रारंभ किया है।
टेलीमेट्री से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से गिद्धों के भूदृश्य उपयोग, आवागमन पैटर्न और मानव-जनित दबावों की जानकारी मिल रही है। इससे प्रमुख पड़ाव स्थलों और भोजन क्षेत्रों की पहचान के साथ बिजली करंट, विषाक्तता और आवास क्षरण जैसे जोखिम वाले क्षेत्रों को चिन्हित करने में सहायता मिल रही है।
यह वैज्ञानिक पहल डेटा-आधारित संरक्षण रणनीति को मजबूत कर रही है, जिससे लुप्तप्राय प्रजातियों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
रीवाइल्डिंग की सफल पहल
रिहा किए गए पाँच गिद्धों में से एक सिनेरियस गिद्ध को विदिशा से रेस्क्यू किया गया था। उस समय उसकी आयु लगभग डेढ़ वर्ष थी। यह विश्व के सबसे बड़े और भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है और भारत में शीतकालीन आगंतुक के रूप में देखा जाता है।
इसी प्रकार वर्ष 2025 में विदिशा, मंडला, बैतूल और सिवनी जिलों से चार लॉन्ग-बिल्ड गिद्धों को रेस्क्यू कर वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में उपचार एवं पुनर्वास के बाद वैज्ञानिक मूल्यांकन उपरांत प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया।
हलाली डैम से उड़ान भरते ये गिद्ध केवल आसमान की ओर नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के नए विश्वास की ओर बढ़े हैं।

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