नसीम खान
सांची,,,,नगर परिषद को वर्षों के इंतजार के बाद डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित आधुनिक कार्यालय भवन मिल गया। भवन का लोकार्पण भी हो चुका है और यहां से कामकाज भी शुरू हो गया है। लेकिन विडंबना यह है कि नगरवासियों को अब भी उन मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है, जिनकी जिम्मेदारी नगर परिषद प्रशासन की है। नगर में जगह-जगह फैली गंदगी, कूड़े के ढेर, अव्यवस्थित नालियां, सड़कों पर बहता पानी और मच्छरों की बढ़ती समस्या स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
भवन आधुनिक, लेकिन व्यवस्थाएं पुराने ढर्रे पर
जानकारी के अनुसार, नगर परिषद को पुराने और जर्जर कार्यालय भवन से मुक्ति दिलाकर आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया भवन उपलब्ध कराने का सपना हाल ही में पूरा हुआ है। लगभग डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार इस भवन का लोकार्पण केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं क्षेत्रीय विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी ने किया था। नवीन भवन से परिषद के कामकाज को व्यवस्थित बनाने की उम्मीद जताई गई थी।
लोकार्पण समारोह में केंद्रीय मंत्री ने जनसमस्याओं का तत्काल निराकरण करने, शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने और नगर को सुंदर एवं स्वच्छ बनाने का आह्वान किया था। क्षेत्रीय विधायक ने भी अपने कार्यकाल के दौरान हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया था। लेकिन जमीनी तस्वीर पर नजर डालें तो नगरवासियों की रोजमर्रा की समस्याएं अब भी समाधान की राह देख रही हैं।
गलियों से सड़कों तक समस्याओं का अंबार
नगर के विभिन्न हिस्सों में साफ-सफाई की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। कई स्थानों पर नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने से गंदा पानी सड़कों पर बहता दिखाई देता है। गली-मोहल्लों में नालियों और सड़कों की समस्याएं बनी हुई हैं। जगह-जगह आवारा सुअरों का विचरण और मच्छरों की भरमार भी नागरिकों की परेशानी बढ़ा रही है। ऐसे हालात में बीमारियों की आशंका को लेकर लोगों की चिंता स्वाभाविक है।
इसके साथ ही कीटनाशक दवाओं के छिड़काव और नियमित सफाई जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत महसूस हो रही है। नगरवासियों के लिए स्वच्छ वातावरण और व्यवस्थित जल निकासी कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरत है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब नगर परिषद का नया भवन तैयार करने में करोड़ों रुपये खर्च किए जा सकते हैं, तो नगर की सफाई और नागरिक सुविधाओं को व्यवस्थित करने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं दिखाई दे रहे?
पेयजल लाइनों से रिसाव, समाधान का इंतजार
नगर में कुछ स्थानों पर पाइपलाइनों के वाल्व में गड़बड़ी के कारण पानी रिसने की समस्या भी सामने आ रही है। यदि समय रहते ऐसी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो पानी की बर्बादी के साथ नागरिकों की परेशानी भी बढ़ सकती है। इन समस्याओं का स्थायी समाधान करने के बजाय यदि व्यवस्थाएं इसी तरह चलती रहीं तो नगर के विकास और स्वच्छता संबंधी दावों पर सवाल उठते रहेंगे।
अब जवाबदेही तय करने की जरूरत
नगर परिषद का भवन बनना निश्चित रूप से एक उपलब्धि है, लेकिन किसी नगर के विकास का वास्तविक आकलन उसके कार्यालय की भव्यता से नहीं, बल्कि वहां रहने वाले नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं से होता है। नगरवासियों को नियमित सफाई, सुचारु जल निकासी, मच्छरों से बचाव, पाइपलाइन रिसाव के निराकरण और व्यवस्थित सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब सवाल यही है कि जब नगर परिषद का नया भवन बनकर तैयार हो गया और वहां से कामकाज भी शुरू हो चुका है, तो सांची की गंदगी दूर करने और नागरिकों की मूलभूत समस्याओं के समाधान की समयसीमा कब तय होगी? नगरवासियों को आश्वासनों से आगे बढ़कर धरातल पर काम दिखाई देने का इंतजार है।





