नगर के सार्वजनिक स्थानों पर नहीं है निस्तार व्यवस्था ।

नसीम खान संपादक
महिलाओं को उठाना पड़ती परेशानी अनभिज्ञ प्रशासन
सांची,, वैसे तो इस स्थल पर विकास के बड़े बड़े दावे तब धराशाई हो जाते हैं जब सार्वजनिक स्थानों पर भी निस्तार की व्यवस्था न होने से महिलाओं पुरुषों के खुले में निस्तार करने मजबूर होना पड़ता है । परन्तु प्रशासन की नजर नहीं पहुंच पाती।
जानकारी के अनुसार इस विश्व विख्यात पर्यटक स्थल पर नगर के विकास पर लाखों करोड़ों खर्च करने की बात देखने सुनने को मिल जाती है तथा नगर का विकास की बात करते करते मुंह नहीं थकता चाहे नगर में सड़कों नालियों गलियों बिजली जलप्रदाय साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं हों हर जगह विकास की बड़ी बड़ी बाते शासन प्रशासन द्वारा करते दिखाई दे जाती है परन्तु जमीनी हकीकत अपनी दुर्दशा की कहानी स्वयं बयां कर रही है नगर के व्यस्ततम क्षेत्र बसस्टेंड परिसर में यहां लोगों का जमावड़ा लगा रहता है परन्तु लोगों की संख्या अनुसार कहीं कोई मूत्राशय तथा महिलाओं के निस्तार की व्यवस्था दिखाई नहीं देती जिससे यहां आने वाले लोगों को निस्तार के लिए यहां वहां भटकने पर मजबूर होना पड़ता है तथा खुले में निस्तार करते लोगों को आसानी से देखा जा सकता है यही हाल गुलगांव चौराहे जो नगर का सबसे अधिक व्यस्ततम चौराहा कहा जाता है इस चौराहे से लगभग तीस चालीस गांव वालों की आवाजाही लगी रहती है यहां से ग्रामीण भोपाल विदिशा जैसे बड़े शहरों में अपने काम से आया जाया करते हैं इसमें न केवल पुरुष ही रहते हैं बल्कि महिला बच्चों की संख्या भी काफी अधिक रहती है तब इस चौराहे पर बैठकर अपने गंतव्य तक पहुंचने इंतजार करना पड़ता है तब न तो चौराहे न ही कहीं आसपास ही निस्तार की व्यवस्था रहती है जिससे लोगों को मजबूर होकर खुले में निस्तार करने पर मजबूर होना पड़ता है हद तो तब हो जाती है जब सबसे अधिक परेशानी इस भीड़ भाड़ वाले क्षेत्र में महिलाओं को उठाना पड़ती है जब निस्तार व्यवस्था न होने से महिलाओं को निस्तार के लिए यहां वहां भटकना पड़ता है अथवा खुले में निस्तार करने पर मजबूर होना पड़ता है परन्तु इस समस्या की सुध न तो प्रशासन न ही शासन में बैठे जिम्मेदार ही उठाने की जहमत उठा पाते हैं तब इस स्थल का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि इस स्थल के विकास की बड़ी बड़ी बाते करने वाले शासन प्रशासन में बैठे लोग ऐसी आवश्यक मूलभूत सुविधाओं से मुंह मोड़ कर अपनी वाहवाही बटोरने में लगे दिखाई दे जाते हैं परन्तु सुविधा उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो जाते हैं । ऐसा भी नहीं है कि नगर परिषद प्रशासन के पास व्यवस्था न हो हालांकि अनेक चलित शौचालय मूत्रालय होने के बाद भी सार्वजनिक स्थानों पर अभाव बना हुआ है जबकि प्रशासन में बैठे जिम्मेदारों ने चलित शौचालय मूत्रालय को सुनसान क्षेत्रों में खडा कर लोगों की नजरों से ओझल कर दिया तब आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस स्थल पर कहां तक सुविधा मुहैया कराई जाती होगी । जिससे लोगों को इन सुविधाओं का लाभ पहुंच सके।

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