विश्व धरोहर सांची का बसस्टैंड मूत्रालय विहीन, पर्यटकों व महिलाओं को भारी परेशानी।करोड़ों के विकास दावों के बीच मूलभूत सुविधा का अभाव, खुले में निस्तार को मजबूर लोग।

नसीमखान सांची

सांची,,, विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थल सांची में विकास के बड़े-बड़े दावे भले ही किए जाते हों, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट नजर आती है। नगर के बसस्टैंड परिसर में आज तक मूत्रालय की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिससे स्थानीय लोगों, दुकानदारों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
बसस्टैंड क्षेत्र, जहां दिनभर यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है, वहां मूत्रालय के अभाव में लोग मजबूरी में खुले में निस्तार करते देखे जा सकते हैं। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि नगर की छवि को भी धूमिल करती है। खासकर महिलाओं और युवतियों के लिए यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है, जिन्हें निस्तार के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है और कई बार शर्मिंदगी का सामना भी करना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार, सांची की ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए यहां करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का दावा किया जाता है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं अब भी उपेक्षित हैं। बसस्टैंड परिसर इसका जीवंत उदाहरण बन चुका है। क्षेत्र में उपलब्ध शासकीय भूमि पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है, जिससे व्यवस्थाएं और भी बदहाल होती जा रही हैं।
स्थानीय दुकानदारों की स्थिति भी चिंताजनक है। उन्हें अपनी दुकानें छोड़कर दूर शौचालय के लिए जाना पड़ता है, जिससे उनके व्यवसाय पर असर पड़ता है। इस दौरान आवारा पशु दुकानों में रखे खाद्य पदार्थों को नुकसान पहुंचा देते हैं।
व्यापारी महासंघ अध्यक्ष संतोष दुबे का कहना है कि यह बसस्टैंड विश्व स्तरीय ऐतिहासिक स्थल का हिस्सा है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। पहले यहां मूत्रालय मौजूद थे, जिन्हें प्रशासन द्वारा हटा दिया गया। वर्तमान में शौचालय काफी दूर होने के कारण व्यापारी और पर्यटक दोनों ही परेशान हैं।
वहीं, नगर परिषद सांची के अध्यक्ष पप्पू रेवाराम ने बताया कि रैन बसेरा एवं नवीन विश्राम गृह निर्माण के साथ शौचालय और मूत्रालय की व्यवस्था प्रस्तावित है। फिलहाल अस्थायी रूप से बसस्टैंड के पीछे मूत्रालय की व्यवस्था कराई जा रही है, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
जब तक बसस्टैंड जैसे प्रमुख स्थलों पर मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित नहीं होंगी, तब तक विकास के दावे अधूरे ही माने जाएंगे।

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