शहडोल में नहीं थम रही दगना कुप्रथा, अंधविश्वास के चलते पाँच महीने के मासूम की उपचार के दौरान मौत,

रिपोर्टर @दीपक कुमार गर्ग
शहडोल। आदिवासी बाहुल्य संभाग में दगना कुप्रथा तेजी से पैर पसार रही है। शासन प्रशासन के तमाम प्रयास और दावे झूठे साबित हो रहे हैं। शहडोल संभाग के शहड़ोल उमारिया, अनूपपुर में सांस लेने में तकलीफ के चलते अंधविस्वास के फेर में ग्रमीण मासूम बच्चो को गर्म सलाखो दागते है ,जिसके चलते कई बच्चों की उपचार के दौरान मासूम बच्चों की मौत दगना कुप्रथा के कारण हो गई है। ताजा मामला शहड़ोल सम्भागीय मेडिकल कालेज में सामने आया है। जंहा सिहंपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पठरा में 5 माह गर्म सलाखो से दागने के चलते हालात ज्यादा बिगड़ने पर उपचार के लिए मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया था ,जंहा उपचार के दौरान मासूम की मौत हो गई है।

सिंहपुर खंड चिकित्सा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पठरा निवासी रामदास कोल के पांच माह के पुत्र ऋषब की तबियत बिगड़ने के बाद उसे नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मे परिजन दो दिन पहले ले कर गए थे, जहाँ स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसकी हालत नाजुक हो गई थी, साथ ही बच्चे के शरीर मे दागने के भी निशान थे, जिससे ऐसा आंकलन किया जा रहा कि बच्चे की तबियत बिगड़ने के बाद पहले परिजनों द्वारा अंध विश्वास मे आकर गर्म सालाखों से दगवाया गया, ज़ब उसकी तबियत ज्यादा बिगड़ने लगी तो उसे सिंहपुर अस्पताल लाया गया। जहाँ से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहाँ से उसे मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। वहाक उपचार के दौरान मासूम की मौत हो गयी।

शहडोल जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है. यहां आज भी अंधविश्वास के चक्कर में ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं, जो लोगों को हैरान कर दे. जिस तरह से मासूम को गर्म सलाखों से दागा गया है. उसे आदिवासी बहुल इलाके में अंकना कुप्रथा कहा जाता है. इसे लेकर ग्रामीणों को भ्रम है, कि इस कुप्रथा से वो मर्ज ठीक हो जाता है, लेकिन जब वही मासूम गंभीर अवस्था में पहुंच जाते है, और जिंदगी और मौत से जूझने लगते हैं, तब फिर वो अस्पताल पहुंचते हैं. फिर अस्पतालों पर ही ठीक होते हैं, तो वहीं कुछ सही समय पर इलाज न मिलने की वजह से अपनी जान भी गंवा देते हैं. फिर भी इस कुप्रथा को लेकर लोगों के विचार नहीं बदल रहे हैं, और इस तरह की घटनाएं सामने आती ही रहती हैं, जो हमारे स्वास्थ्य सिस्टम पर कई सवाल भी खड़े कर रहा है।

इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर ए के लाल का कहना है कि बच्चे का निमोनिया बिगड़ने स उसे सेफ्टी सिमिया हो गया था, उसे काफी नाजुक हालत मे जिला अस्पताल लाया गया था। इस लिए उसे समुचित उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था, जहाँ उसकी मृत्यु कल हो जाने की जानकारी मिली हैं।

नसीम खान

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