नसीम खान
सांची,,, नगर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित नागौरी की पहाड़ी अपने भीतर प्राचीन इतिहास और सभ्यता की कई निशानियां समेटे हुए है। पहाड़ी क्षेत्र में मौजूद कुछ ऐतिहासिक धरोहरों को पुरातत्व विभाग ने संरक्षित कर लिया है, जबकि कई प्राचीन अवशेष आज भी खुले आसमान के नीचे अपनी प्राचीनता की गवाही दे रहे हैं। इन धरोहरों की सुरक्षा और देखरेख ग्रामीण स्वयं करते आ रहे हैं।
नागौरी की पहाड़ी पर स्थित नागदेवता की करीब आठ फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा ग्रामीणों के लिए विशेष आस्था का केंद्र बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार यह प्रतिमा हजारों वर्ष प्राचीन है। प्रतिमा पर नाग के आकार की कलाकृतियां बनी हुई हैं, जिसके चलते इसे नागदेवता की प्रतिमा माना जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस प्राचीन प्रतिमा की सुरक्षा और साफ-सफाई का जिम्मा वे स्वयं संभालते हैं। तीज-त्योहारों और धार्मिक अवसरों पर ग्रामीण यहां पहुंचकर प्रतिमा की साफ-सफाई करते हैं तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। समय-समय पर प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित करने का क्रम भी जारी रहता है।
श्रावण माह को भगवान शिव की आराधना का विशेष माह माना जाता है। इसी क्रम में ग्रामीण नागौरी पहाड़ी पर पहुंचे और नागदेवता की प्रतिमा की साफ-सफाई कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।
हालांकि नागौरी पहाड़ी के अधिकांश क्षेत्र में सोलर प्लांट स्थापित हो चुका है, इसके बावजूद यह प्राचीन प्रतिमा आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाए हुए है। ग्रामीणों की आस्था और संरक्षण के कारण हजारों वर्ष पुरानी मानी जाने वाली यह प्रतिमा आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
आस्था और इतिहास का यह संगम आज भी नागौरी पहाड़ी की प्राचीन विरासत को जीवंत बनाए हुए है।





