नसीमखान
सांची। नगर के मुख्य बस स्टैंड परिसर में स्थित यात्री प्रतीक्षालय जर्जर हालत में पहुंच चुका है। लगभग 35 वर्ष पूर्व विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित यह प्रतीक्षालय आज प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर आवारा पशुओं और दोपहिया वाहनों का ठिकाना बन कर रह गया है।
एक समय यात्रियों की सहूलियत के लिए निर्मित इस प्रतीक्षालय की दशा अब इतनी खराब हो गई है कि न तो यहां यात्री रुकते हैं और न ही कोई सुविधा दिखाई देती है। प्रतीक्षालय का उद्घाटन शिलालेख तक समय की धूल में छिप गया है।
विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के कार्यकाल के बाद से अब तक न तो किसी स्थानीय प्रशासन ने इस प्रतीक्षालय की सुध ली और न ही इसके मरम्मत के कोई प्रयास किए गए। इस दौरान नगर पालिका में कई सीएमओ (मुख्य नगर पालिका अधिकारी) आए और चले गए, लेकिन प्रतीक्षालय की दुर्दशा जस की तस बनी रही। प्रतीक्षालय आज भी इस इंतजार में है कि कब प्रशासन इसकी हालत पर ध्यान देगा।
यही नहीं, प्रतीक्षालय के समीप ही संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर जी की प्रतिमा स्थापित है, जिस पर देश-विदेश से आने वाले अनुयायी और विशिष्टजन श्रद्धा अर्पित करते हैं। बस स्टैंड परिसर के बीचोंबीच स्थित यह प्रतीक्षालय अब गुमठी धारियों के अतिक्रमण का शिकार हो चला है
यह क्षेत्र राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का सार्वजनिक केंद्र भी है, जहां आए दिन बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं, परंतु फिर भी प्रशासन उदासीन बना हुआ है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस प्रतीक्षालय के स्थान पर व्यवस्थित रूप से दुकानों का निर्माण कर व्यवसायियों को आवंटित किया जाए, तो इससे नगर की छवि संवर सकती है और प्रशासन की आय में भी वृद्धि हो सकती है।
नगरवासियों ने प्रशासन से इस प्रतीक्षालय की स्थिति को लेकर शीघ्र संज्ञान लेने की मांग की है।






