नसीमखान
सांची,,,
एक ओर जहां सांची जैसे विश्वविख्यात पर्यटन स्थल पर गर्मी और उमस ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर रखा है, वहीं दूसरी ओर अब झींगुरों का आतंक लोगों की परेशानी और बढ़ा रहा है।
बीते कुछ दिनों से क्षेत्र में मानसून की हल्की फुहारें ही पड़ी हैं, जो गर्मी से राहत देने की बजाय वातावरण में उमस बढ़ा रही हैं। ऐसे में दिन भर की तपन और रात में झींगुरों की चीख-पुकार ने नगरवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। शाम ढलते ही ये कीटाणु झुंड के रूप में घरों में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे भोजन करना तक मुश्किल हो जाता है।
न सिर्फ इनकी आवाज़ से नींद हराम हो रही है, बल्कि झींगुरों के काटने और बच्चों के नाक-कान में घुसने का भय भी लोगों में दहशत पैदा कर रहा है। कई परिवार छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर रातभर जागते देखे जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले नगर पालिका द्वारा नियमित रूप से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता था, जिससे मच्छर, मक्खी और झींगुरों पर नियंत्रण रहता था। लेकिन अब न गलियों में दवा छिड़काव हो रहा है, न ही गंदगी वाले स्थानों की साफ-सफाई की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, कीटनाशक दवाओं की खरीद फरोख्त तो होती होगी लेकिन उनका प्रयोग ज़मीनी स्तर पर न हो कर कागजों मे ही सिमटकर रह गया ।तब नगर प्रशासन की निष्क्रियता और जिला प्रशासन की चुप्पी से नागरिकों में भारी रोष है। राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन आंखें मूंदे हुए है, और इसका खामियाजा सीधे तौर पर नगरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इससे न केवल आमजन प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की सांची को लेकर धारणा भी प्रभावित हो रही है। यह स्थिति नगर की छवि पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है।
नगरवासियों ने मांग की है कि जल्द से जल्द कीटनाशक दवाओं का छिड़काव शुरू किया जाए और झींगुरों के प्रकोप से राहत दिलाई जाए, अन्यथा यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।






