सावन सोमवार पर शिवालयों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, बेलपत्र का पौधा रोपकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

नसीमखान
सांची।। सावन माह के पावन सोमवार को नगर सहित समूचे क्षेत्र में शिव भक्तों की आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिला। अलसुबह से ही मंदिरों में हर-हर महादेव के जयकारों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का क्रम दिनभर चलता रहा। मंदिरों के प्रांगण भक्ति भाव से सराबोर हो उठे।
सावन सोमवार को हिन्दू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से कुँवारी कन्याएं योग्य वर के लिए और विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। पुरुष वर्ग भी पूरे भक्ति भाव से उपवास रखकर भगवान शंकर की आराधना में लीन रहते हैं। बच्चे भी शिवजी के भजनों में उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। इसी कडी मे हनुमान मंदिर कानाखेडा मे महिलाओं की खासी भीड़ दिखाई दी तथा महिलाओं के जनसमूह ने हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी शिवलिंग निर्माण एवं अभिषेक किया गया ।
इसी श्रृंखला में आज नगर स्थित प्राइमरी स्कूल परिसर में स्थित शिव मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन की स्मृति में चल रहे “माँ के नाम एक पौधा” अभियान के तहत बेलपत्र का पौधा रोपित किया गया। बेलपत्र, जो स्वयं भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है, उसका पौधरोपण एक धार्मिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण माना गया।
पौधरोपण करने वालों में नगर के वरिष्ठ समाजसेवी सी.एल. तिवारी, प्रकाश कटारे, सुरेन्द्र सिंह जाट और संजय शाहनी प्रमुख रूप से शामिल रहे। उन्होंने न सिर्फ पौधा लगाया बल्कि यह संकल्प भी लिया कि वे इस पौधे की देखभाल करते हुए इसे वृक्ष बनने तक पोषित करेंगे।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को सावन माह में अधिक से अधिक पौधरोपण करने का आह्वान किया, विशेषकर मंदिर परिसरों को हरित करने हेतु। यह पहल धार्मिक श्रद्धा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय प्रयास के रूप में सामने आई।
नगर के शिवालयों हनुमान मंदिर जैसे महादेव मंदिर, सहित अन्य मंदिरों में दिनभर भजन-कीर्तन, शिव महिमा का पाठ एवं प्रसाद वितरण होता रहा। श्रद्धालु शिवजी को दूध, जल, बेलपत्र, भस्म और धतूरा अर्पित कर कृतार्थ हो रहे थे
नगर पूरी तरह हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयघोषों से गुंजायमान रहा ।

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