नसीमखान
सांची,,
लगातार हो रही भारी बारिश ने नगर व क्षेत्र का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिला प्रशासन सुरक्षा को लेकर आदेश-निर्देश तो जारी करता है, लेकिन हकीकत यह है कि लोग और पशु अपनी सुरक्षा के लिए जर्जर खंडहर भवनों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, नगर में बारिश से बचाव के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। पर्यटक, स्थानीय लोग और बेसहारे परिवार तेज बारिश के दौरान सुरक्षित ठिकाने के अभाव में पेड़ों के नीचे ठहरने को विवश होते हैं, जहां बिजली गिरने का हमेशा खतरा बना रहता है। ऐसे में लोग व पशु दोनों ही बारिश से बचने के लिए खंडहर भवनों में शरण लेने लगे हैं।
उल्लेखनीय है कि नगर में विभिन्न विभागों के अंतर्गत कई खंडहर भवन हैं जिन्हें जिला प्रशासन अनुपयोगी घोषित कर चुका है। इन्हें ढहाने के लिए चिन्हित भी किया गया था, लेकिन कार्रवाई अमल में नहीं आ पाई। यही कारण है कि अब यह जर्जर भवन लोगों और पशुओं के लिए बारिश से बचने का अस्थायी ठिकाना बन गए हैं। जबकि यह कहना कठिन है कि ये भवन कब धराशायी होकर किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन जाएं।
इधर, नगर में रैनबसेरा का निर्माण कार्य भी वर्षों से अधूरा पड़ा है। स्वीकृति के बावजूद यह योजना कछुआ गति से आगे बढ़ रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जिला प्रशासन जहां एक ओर खंडहर भवनों की खतरनाक स्थिति पर आदेश जारी करता है, वहीं दूसरी ओर विभागीय लापरवाही के कारण जमीनी स्तर पर सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे हैं। सवाल खड़े हो रहे है।






