नसीमखान
सांची,,
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कही जाने वाली पत्रकारिता का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाना और सरकारी नीतियों की कमियों को उजागर करना है। लेकिन रायसेन जिले के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों कुछ बाहरी कथित पत्रकारों की गतिविधियों से पत्रकारिता की गरिमा धूमिल होती जा रही है।
जानकारी के अनुसार, भोपाल-विदिशा जैसे बड़े शहरों से आने वाले कई तथाकथित पत्रकार पंचायत क्षेत्र और विभागों में कार्यरत कर्मचारियों पर दबाव बनाने, अवैध वसूली करने तथा निजी स्वार्थ साधने में जुटे हुए हैं। ये लोग कभी-कभी सूचना के अधिकार (RTI) का दुरुपयोग कर कर्मचारियों को परेशान करने से भी नहीं कतराते। नतीजतन, अधिकारी-कर्मचारी परेशान होकर अपनी व्यथा स्थानीय पत्रकारों तक पहुँचाने को मजबूर हो रहे हैं।
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि असली पत्रकार जनता और प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करता है। वह आमजन की समस्याओं को न केवल उजागर करता है, बल्कि नीतियों की खामियों को सामने लाकर सरकार को आइना दिखाने का साहस भी करता है। इसके विपरीत बाहरी अड़ीबाज पत्रकार पत्रकारिता की छवि को कलंकित कर रहे हैं।
हालांकि जिला प्रशासन ने जिलेभर के पत्रकारों का पंजीयन कर फर्जी पत्रकारों पर आंशिक अंकुश लगाया है, फिर भी बाहरी स्तर पर ब्यूरो या संवाददाता का झूठा परिचय देकर सक्रिय इन तत्वों पर सख्त कार्यवाही की आवश्यकता है।
स्थानीय पत्रकारों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अड़ीबाज तत्वों पर लगाम कसकर पत्रकारिता की गरिमा बचाई जाए, ताकि लोकतंत्र का यह चौथा स्तंभ अपनी असली भूमिका निभा सके और प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी शोषण से बच सकें। तथा पत्रकारिता की छवि धूमिल होने से बच सके ।






