नसीमखान
सांची,,एक ओर आम आदमी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए जद्दोजहद कर रहा है, तो दूसरी ओर बढ़ती महंगाई ने उसकी कमर तोड़ दी है। स्थिति यह है कि हर गुजरते दिन के साथ खाद्य पदार्थों से लेकर सब्जी-फलों तक के दाम आसमान छू रहे हैं। त्योहारों के मौसम में तो यह बोझ और भी बढ़ जाता है।
जानकारों का कहना है कि महंगाई किसी एक वस्तु तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग हर जरूरी चीज़ के दामों में बेतहाशा वृद्धि हो चुकी है। सब्जियों की कीमतें जहां मध्यम वर्ग की थाली से गायब हो रही हैं, वहीं फलों का स्वाद अब आम आदमी की पहुंच से दूर हो गया है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस महंगाई पर न तो सरकार की कोई ठोस नीति दिखाई देती है और न ही प्रशासन की कोई संवेदनशीलता। गरीब तबके को जहां राशन वितरण प्रणाली से गेहूं-चावल की राहत मिल जाती है, वहीं अमीर वर्ग पर महंगाई का कोई खास असर नहीं होता। परंतु बीच का मध्यम वर्ग—जो न गरीबों की लाइन में लग सकता है और न ही अमीरों के सहारे जी सकता है—आज सबसे ज्यादा पिस रहा है।
रसोई महंगी होने का सीधा असर महिलाओं पर पड़ रहा है। घर चलाना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर सरकार की नजरें मध्यम वर्गीय परिवारों पर कब पड़ेंगी? कब इस तबके को भी राहत की सांस मिलेगी?
आज हालात ऐसे हैं कि मध्यम वर्ग केवल ‘मुंह ताकने’ को मजबूर है। यदि सरकार ने समय रहते महंगाई पर अंकुश लगाने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह वर्ग धीरे-धीरे टूटकर हताशा के गर्त में चला जाएगा।






