नसीमखान सांची
सांची,,
सरकार गरीबों के उत्थान और महिला सशक्तिकरण के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों को झुठलाती नज़र आती है। ऐतिहासिक नगर सांची की चमक-दमक के पीछे गरीबी और गंदगी की दर्दनाक तस्वीरें अब भी बदस्तूर जारी हैं। यहां महिलाएं और बच्चे गंदगी के ढेरों में रोज़ी तलाशते दिखाई देते हैं — यह न केवल शासन-प्रशासन की नाकामी को उजागर करता है, बल्कि इस विश्वविख्यात पर्यटन स्थल की छवि पर भी धब्बा लगाता है।
जानकारी के अनुसार, सांची विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान रखता है, जहां प्रतिदिन देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। लेकिन नगर के कुछ हिस्सों में फैली गंदगी और उसमें जीवन-यापन करती महिलाओं को देखकर पर्यटक दंग रह जाते हैं। यह दृश्य सांची की गौरवशाली पहचान को म्लान कर देता है।
सरकार ने गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और स्वच्छता के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग भी जागरूकता अभियान चलाता रहता है। बावजूद इसके, जब महिलाएं गंदगी के बीच अपनी रोज़ी तलाशती दिखाई देती हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि योजनाओं का लाभ उन तक नहीं पहुंच पा रहा।
इन हालातों में जहां एक ओर नगर की छवि देश-विदेश में प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की संवेदनहीनता भी उजागर होती है। जो मंचों से स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण की बातें करते हैं, वे इन महिलाओं की सुध तक नहीं लेते।
अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि इन महिलाओं की वास्तविक स्थिति को समझकर ठोस कदम उठाएँ। गंदगी में अपनी रोज़ी खोजने को मजबूर ये महिलाएँ केवल सरकारी योजनाओं की नाकामी नहीं, बल्कि समाज के संवेदनहीन हो जाने की तस्वीर भी हैं। यदि प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाए तो इन्हें स्वच्छ और सम्मानजनक रोज़गार उपलब्ध कराया जा सकता है। अधिकारी इस गंभीर विषय पर ध्यान देंगे और इन महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने की दिशा में सार्थक कदम उठाएंगे — क्योंकि सांची की पहचान केवल ऐतिहासिक स्मारकों से नहीं, बल्कि यहां के लोगों की गरिमा से भी है।






