नसीमखान सांची
सांची,,, नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों “पुलिस” और “प्रेस” लिखे वाहनों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। ऐसे वाहन खुलेआम सड़कों पर फर्राटे भरते देखे जा सकते हैं, जबकि इनमें से अधिकतर का न तो पुलिस से और न ही पत्रकारिता से कोई वास्तविक संबंध होता है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस द्वारा नगर में जगह-जगह जांच पाइंट तो बनाए गए हैं, जहां आम वाहनों की जांच होती है, परंतु “पुलिस” या “प्रेस” लिखे वाहन जांच से आसानी से बच निकलते हैं। नतीजतन, कई बार इन्हीं वाहनों का उपयोग संदिग्ध और अवैध गतिविधियों में भी किया जाता है। कई ऐसे वाहन पूर्व में पुलिस के हत्थे भी चढ़ चुके हैं।
इन फर्जी प्रेस और पुलिस लिखे वाहनों ने न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि सच्चे और निष्ठावान पत्रकारों की छवि पर भी दाग लगाया है। पत्रकारिता के नाम पर कुछ कथित लोग गले में बैग और चैनल आईडी लटकाकर, प्रेस कार्ड जेब में रखकर सड़कों पर सक्रिय हैं — जो पत्रकारिता के नाम पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।तथा अडीबाजी को अंजाम देने से नहीं चूक रहे है तब अधिकारी कर्मचारी भी पत्रकारिता को कोसते दिखाई दे रहे है।
इस प्रकार की गतिविधियाँ प्रशासनिक व्यवस्था में भी बाधा उत्पन्न कर रही हैं। अधिकारी-कर्मचारियों को यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन असली पत्रकार है और कौन फर्जी। नतीजा यह होता है कि वास्तविक पत्रकारों को भी संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा है।
हालांकि कुछ समय पहले जिला प्रशासन द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची जारी की जा चुकी है, फिर भी ग्रामीण इलाकों से लेकर सांची, सलामतपुर, दीवानगंज और भोपाल-विदिशा तक के लोग इस क्षेत्र में पहुंच कर पत्रकारिता को कलंकित कर रहे है फर्जी प्रेस वाहनों की चर्चा आम है। इन वाहनधारकों के कारण न केवल पत्रकारिता की साख खतरे में पड़ रही है बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। पुलिस को पुलिस, एवं प्रेस लिखे वाहनों की सख्त जांच करने की जरुरत मेहसूस हो रही हैं।इस मामले में इनका कहना है।।
हम पुलिस, प्रेस लिखे वाहनों की भी जांच करेंगे वाहन के साथ पुलिस प्रेस शब्द का स्तेमाल करने वालों की भी जांच की जायेगी ।गलत पाये जाने पर कडी कार्यवाही की जायेगी।जेपी त्रिपाठी थाना प्रभारी सांची






