नसीमखान सांची
सांची,,,
सांची क्षेत्र वैसे तो अपने समृद्ध पुरातात्त्विक महत्व के लिए जाना जाता है, जहां अधिकांश भूभाग में प्राचीन काल की अमूल्य पुरासंपदा बिखरी पड़ी है। परंतु देखरेख के अभाव में यह धरोहर आज भगवान भरोसे लावारिस हालत में पड़ी हुई है।
जानकारी के अनुसार, यह स्थल लगभग ढाई हजार वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक विरासत को समेटे हुए है। पुरातत्व विभाग ने भले ही यहां स्थित कुछ प्रसिद्ध स्मारकों को अपने संरक्षण में लिया हो, परंतु इसके आसपास फैली अनेक पुरावशेषों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। परिणामस्वरूप यह धरोहरें धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं।
सांची से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित नागौरी की पहाड़ी इसका जीवंत उदाहरण है। इस पहाड़ी की विशाल चट्टानों पर प्राचीन काल के शैलचित्र उकेरे हुए हैं, जो अब भी उस युग की संस्कृति, जीवनशैली और मान्यताओं की झलक प्रस्तुत करते हैं। देशी-विदेशी पर्यटक इन शैलचित्रों को देखने यहां पहुंचते हैं, लेकिन संरक्षण और सुरक्षा के अभाव में कई चित्र नष्ट हो चुके हैं, जबकि शेष शैलचित्र भी अपनी उपेक्षा की कहानी खुद बयां कर रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीण अपने स्तर पर इन शैलचित्रों की रक्षा करने का प्रयास करते हैं, परंतु यह प्रयास सीमित हैं। पुरातत्व विभाग और प्रशासन की उदासीनता के कारण इन बहुमूल्य धरोहरों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
संरक्षण की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता।
इतिहासकारों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन इस स्थल की सुरक्षा, शोध एवं संरक्षण की दिशा में ठोस पहल करें, तो यह स्थान न केवल पर्यटन की दृष्टि से आकर्षक केंद्र बन सकता है, बल्कि हमारे अतीत की कीमती विरासत को भी भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा।
ऐतिहासिक शैलचित्रों के संरक्षण के लिए समय रहते कदम उठाना अब अत्यंत आवश्यक हो गया है, अन्यथा यह धरोहरें इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह जाएंगी।






