बौद्ध मेले के बाद गंदगी का अंबार, नालों से उठती बदबू बनी से लोग परेशान।मेले को गुजरे दो सप्ताह, दुकानदारों की छोड़ी गंदगी से बढ़ा मच्छर और बीमारियों का खतरा।

नसीमखान सांची
सांची,,
विश्वविख्यात ऐतिहासिक स्थल सांची में वर्ष में एक बार आयोजित होने वाला बौद्ध मेला तो समाप्त हो गया, लेकिन यह मेला अपने पीछे गंदगी और बदबू की गंभीर समस्या छोड़ गया है। मेले के बाद दुकानदारों द्वारा छोड़ी गई गंदगी नालों में अब भी पड़ी हुई है, जो बदबू फैलने के साथ-साथ नगर की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
जानकारी के अनुसार बौद्ध मेले को समाप्त हुए दो सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है। मेले के आयोजन को लेकर प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां की जाती हैं तथा नगर परिषद द्वारा नियत दरों पर दुकानदारों को स्थान उपलब्ध कराया जाता है। बताया जाता है कि मेला समापन के लगभग एक सप्ताह बाद सभी दुकानें हटा ली जाती हैं, लेकिन उनके पीछे छोड़ी गई गंदगी नालों में ही डाल दी जाती है।
हालांकि मेला समाप्ति के बाद नगर परिषद के सफाई कर्मचारी लगातार नगर को साफ-सुथरा बनाने में जुटे रहते हैं और उन्हें दिन-रात सफाई की मशक्कत करनी पड़ती है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा दुकानदारों एवं आगंतुकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने में कमी नजर आती है। इसी का परिणाम है कि दुकानदार बेखौफ होकर कचरा नालों में डालकर चले जाते हैं।
नालों में लंबे समय तक गंदगी जमा रहने से दुर्गंध फैल रही है, जिससे नगर में मच्छरों की संख्या बढ़ रही है और विभिन्न बीमारियों के फैलने की आशंका भी गहराती जा रही है। अधिकांश स्थानों पर दुकानें नालों के ठीक पीछे लगाई जाती हैं, जहां आम लोगों या अधिकारियों की नजर कम ही पहुंच पाती है। इसका खामियाजा अंततः नगरवासियों को भुगतना पड़ रहा है और इससे ऐतिहासिक स्थल सांची की छवि धूमिल होने का खतरा भी बढ़ गया है।
इस संबंध में नगर परिषद सांची के सीएमओ रामलाल कुशवाहा ने बताया कि “मेले के समापन के दौरान पूरी तरह सफाई करवाई गई थी। फिर भी यदि कहीं गंदगी रह गई है तो हम पुनः निरीक्षण कराकर सफाई करवा देंगे।”
प्रशासनिक दावों के बावजूद, जब तक मेले के बाद की सफाई और दुकानदारों की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक सांची की स्वच्छता और विश्व धरोहर की गरिमा पर सवाल उठते रहेंगे।

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