नसीमखान सांची
सांची,,,
नगर के सांदीपनि विद्यालय को सरकार की ओर से एक बड़ी सौगात शीघ्र मिलने की संभावना है। विद्यालय के लिए करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित नवनिर्मित भवन लगभग पूर्ण हो चुका है तथा केवल कुछ छिटपुट कार्य शेष बताए जा रहे हैं। भवन के पूर्ण होने के बाद विद्यार्थियों को लंबे समय से चली आ रही भवन संबंधी समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार नगर में पूर्व में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संचालित होता रहा है, जिसका भवन देश की आज़ादी के बाद वर्ष 1955 में “जनता कॉलेज” के नाम से निर्मित कराया गया था। इस भवन का लोकार्पण उस समय भारत के तत्कालीन रेल मंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री के करकमलों द्वारा किया गया था। तभी से इसी भवन में शासकीय विद्यालय का संचालन होता आ रहा है।
विगत वर्षों में क्षेत्रीय विधायक एवं मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री डा प्रभूराम चौधरी के प्रयासों एवं विकास का जामा पहनाने की कवायद अंतर्गत विद्यालय के नवीन भवन की स्वीकृति प्राप्त हुई। शासन द्वारा करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत कर आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए भवन का निर्माण कराया गया, जो विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
वर्तमान में विद्यालय में लगभग 1100 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए विद्यालय को 12 स्कूली बसें भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिनके माध्यम से लगभग 20 किलोमीटर के दायरे में स्थित बांसखेड़ा, गुलगांव, ऐरन, बेरखेड़ी, दीवानगंज, खामखेड़ा, रतनपुर, तिजालपुर, बरोला, बागोद सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से विद्यार्थियों को लाया-ले जाया जा रहा है।
विद्यालय में वर्तमान में प्राचार्य अनिल दीक्षित के नेतृत्व में शैक्षणिक एवं अनुशासनात्मक व्यवस्था संचालित हो रही है। विद्यालय में सभी विषयों की शिक्षा उपलब्ध है। नवनिर्मित भवन के लोकार्पण के पश्चात विद्यालय को नए परिसर में स्थानांतरित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में यह विद्यालय शिवराज सिंह चौहान सरकार के कार्यकाल में “सीएम राइज स्कूल” के नाम से जाना जाता था, जिसे बाद में डॉ. मोहन यादव सरकार के गठन के पश्चात “सांदीपनि विद्यालय” नाम दिया गया।
नवीन भवन के साथ अब शासन एवं शिक्षा विभाग से यह अपेक्षा की जा रही है कि शिक्षकों सहित अन्य आवश्यक संसाधनों की भी समय पर पूर्ति की जानी चाहिए जिससे विद्यार्थियों को पूर्ण रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सके।






