नसीमखान सांची
सांची,,,
जहाँ ऐतिहासिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और स्वच्छता पर सरकारों द्वारा लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, वहीं सीमित आर्थिक संसाधनों और बजट के बावजूद सांची का स्तूप परिसर स्वच्छता और सुंदरता की एक मिसाल बनकर उभरा है।
विश्व विख्यात बौद्ध स्तूप परिसर अपनी पुरातात्विक और ऐतिहासिक पहचान के लिए जाना जाता है। इसे स्वच्छ और आकर्षक बनाए रखने के लिए वर्षों से विभिन्न योजनाएं और प्रयास किए गए, जिन पर भारी धनराशि भी खर्च हुई, लेकिन अपेक्षित परिणाम अक्सर धरातल पर नजर नहीं आए। न तो यह स्थल पूरी तरह सौंदर्य की चादर ओढ़ सका और न ही स्वच्छता का समुचित जामा पहन पाया।
इसके विपरीत, स्तूप प्रशासन ने अपने सीमित संसाधनों और बजट के भीतर रहते हुए उल्लेखनीय कार्य किया है। जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के सतत प्रयासों से आज स्तूप परिसर पूरी तरह स्वच्छ, सुव्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप में दिखाई देता है। यहाँ प्रत्येक कर्मचारी स्वच्छता बनाए रखने में तत्पर नजर आता है।
सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही सुदृढ़ है। दिन-रात तैनात सुरक्षा कर्मी अपनी जिम्मेदारियों का निष्ठा से निर्वहन करते हैं। आगंतुकों की सघन जांच के बाद ही परिसर में प्रवेश दिया जाता है। पूरा क्षेत्र सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहता है, वहीं अधिकारी व्यवस्थाओं पर सतत नजर बनाए रखते हैं।
यही कारण है कि यहाँ आने वाले देश-विदेश के विशिष्ट और अति विशिष्ट अतिथि स्तूप परिसर की स्वच्छता, सुंदरता और अनुशासन की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते नहीं थकते। यह परिसर अन्य विभागों और नगर प्रशासन के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिससे पूरे नगर को स्वच्छता और सौंदर्य का जामा पहनाया जा सकता है।
इस संबंध में स्तूप प्रभारी संदीप मेहतो ने बताया कि कर्मचारियों को नियमित रूप से दिशा-निर्देश दिए जाते हैं और सुरक्षा व्यवस्था को हर समय चौकस रखा जाता है। वे स्वयं दिन में तीन से चार बार निरीक्षण करते हैं और किसी भी प्रकार की कमी बर्दाश्त नहीं की जाती। सीमित संसाधनों के बावजूद यह सुनिश्चित किया जाता है कि पर्यटकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
स्तूप परिसर यह साबित करता है कि इच्छाशक्ति, अनुशासन और जिम्मेदारी हो तो सीमित साधनों में भी बड़े उदाहरण गढ़े जा सकते हैं।





