अवैध कॉलोनियों की बाढ़ से कृषि भूमि पर संकट, प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल।ऊंची राजनीतिक पहुंच के सहारे फल-फूल रहा प्लाटिंग का खेल, वैध-अवैध की पहचान मुश्किल।

नसीमखान सांची
सांची,,, क्षेत्र में लंबे समय से कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। बड़े-बड़े कॉलोनाइजर ऊंचे दामों पर कृषि भूमि खरीदकर प्लाटिंग के माध्यम से मंहगे दामों में बेच रहे हैं। इससे न केवल कृषि योग्य जमीन का दायरा सिमट रहा है, बल्कि भविष्य में खाद्यान्न उत्पादन पर भी खतरे के संकेत दिखाई देने लगे हैं।
जानकारों का कहना है कि कृषि भूमि से उत्पन्न अनाज ही देशभर की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करता है। ऐसे में खेती की जमीन को व्यवस्थित अनुमति के बिना आवासीय कॉलोनियों में बदलना चिंताजनक है। क्षेत्र में कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं, लेकिन वैधता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। आमजन के लिए यह समझ पाना कठिन हो गया है कि कौन सी कॉलोनी अधिकृत है और कौन सी अनाधिकृत।
हालांकि पूर्व में प्रशासन द्वारा कुछ अवैध कॉलोनाइजरों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी, परंतु स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि राजनीतिक रसूख के चलते कार्रवाई प्रभावी साबित नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप कॉलोनाइजरों के हौसले बुलंद होते गए और कृषि भूमि पर कब्जे का सिलसिला जारी रहा।
इतना ही नहीं, कुछ मामलों में कृषि भूमि को “फार्म हाउस” के नाम पर खरीदा जा रहा है, जहां बाद में बड़े व्यावसायिक निर्माण खड़े हो जाते हैं। यह भी आरोप है कि छोटे निर्माण कार्यों पर सख्ती बरतने वाले संबंधित विभाग बड़े निर्माणों के मामले में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पा रहे, जिससे सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्षेत्र में तेजी से घटती कृषि भूमि और बढ़ती अवैध प्लाटिंग को लेकर अब प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में कृषि भूमि का अस्तित्व गंभीर संकट में पड़ सकता है।
इनका कहना है
“क्षेत्र में जहां-जहां कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। जो भी कॉलोनी नियम विरुद्ध पाई जाएगी, उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
— ललित सक्सेना, नायब तहसीलदार, सांची।
यदि खेती की जमीन ही खत्म होती रही, तो विकास की यह दौड़ भविष्य की भूख बन सकती है।

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