नसीमखान सांची
शिलॉन्ग/रायसेन
साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, प्रख्यात विद्वान आचार्य प्रोफेसर यज्नेश्वर एस. शास्त्री को प्रतिष्ठित ‘दर्शन रत्न’ सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान उन्हें इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ सोशल फिलॉसफी (ICSP) द्वारा दर्शन शास्त्र के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।
सम्मान समारोह का आयोजन
मेघालय की नार्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (NEHU), शिलॉन्ग में 25 मार्च को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रोफेसर शास्त्री को इस उपाधि से विभूषित किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश के दार्शनिकों और विद्वानों ने उनके द्वारा दर्शन जगत में किए गए कार्यों की सराहना की।
दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान
प्रोफेसर शास्त्री वर्तमान में साँची विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में मार्गदर्शन देने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं:
- शंकर साहित्य का सरलीकरण: वे आदि गुरु शंकराचार्य के गूढ़ साहित्य को जन-सामान्य के लिए सरल और सुबोध भाषा में तैयार करने के मिशन पर काम कर रहे हैं।
- शोध को प्रोत्साहन: ‘शंकर न्यास’ के माध्यम से वे युवा शोधार्थियों का निरंतर मार्गदर्शन कर रहे हैं, ताकि भारतीय दर्शन की परंपरा आगे बढ़ सके।
- अकादमिक नेतृत्व: साँची विश्वविद्यालय में कुलाधिपति के रूप में उनके नेतृत्व में भारतीय ज्ञान परंपरा और बौद्ध दर्शन पर विशेष शोध कार्य किए जा रहे हैं।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार और शिक्षा जगत के विभिन्न दिग्गजों ने प्रोफेसर शास्त्री को बधाई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान न केवल प्रोफेसर शास्त्री का है, बल्कि यह भारतीय दर्शन की समृद्ध विरासत का भी सम्मान है।





