रिपोर्ट राजर्षि मिश्रा
काली पूजा के बाद प्रतिमा विसर्जन एक अत्यंत भावुक और ऐतिहासिक दृश्य होता है, जहाँ हज़ारों श्रद्धालु ‘अगले बरस जल्दी आना’ के नारों के साथ नम आंखों से मां को विदाई देते हैं, देश भर सहित प्रदेश भर में विभिन्न क्षेत्रों और अन्य स्थानों पर यह समारोह विशाल जुलूस, ढोल-नगाड़ों और भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है, जो परंपरा और संस्कृति का अनूठा मेल है।
उमरिया जिले मानपुर जनपद पंचायत अन्तर्गत धार्मिक स्थल ग्राम चिल्हारी में दो काली जी की प्रतिमा विराजमान थी 10 दिन शक्ति की भक्ति में पूरा गांव डूबा रहा 11 वे दिन रविवार को मां की देर शाम नम आंखों से विदाई की गई भव्य दिव्य अलौकिक ढोल नगाड़ा गांजे बाजे के साथ चल समारोह जुलूस निकाला गया जो ऐतिहासिक मनोरम दृश्य रहा श्रद्धालु माता की प्रतिमाओं को अपने कंधों पर उठाकर या सजे-धजे वाहनों में पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ ग्राम भ्रमण के बाद विसर्जन स्थल तक ले गए।
भावुक विदाई: ‘विसर्जन को चली मोरी माई’ जैसे गीतों के साथ माहौल भावुक हो जाता है, जब भक्त अपनी आराध्य मां से बिछड़ने पर रोते हैं और उनसे भूल-चूक के लिए माफी मांगते हैं।
ऐतिहासिक परंपरा चिल्हारी के बड़का तालाब में विसर्जन का भव्य नजारा होता है, जहाँ वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार माँ काली की प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाता है।
विसर्जन विधि: श्रद्धालु मां को अगले वर्ष फिर से आने का निमंत्रण देकर, ‘विसर्जनं न जानामि’ जैसे मंत्रों के साथ विधिवत विसर्जन करते हैं।
शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पुलिस रही मुस्तैद
काली विसर्जन चल समारोह जुलूस में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए जगह-जगह पुलिस मुस्तैद रही अमरपुर चौकी प्रभारी अभिलाष सिंह स्वयं मोर्चा संभाले रहे और शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील कीए शांतिपूर्वक मां जगत जननी जगदंबा महाकाली का विसर्जन किया गया इस अवसर विसर्जन ऐतिहासिक जूलूस देखने दूर दराज के गांव के लोग भी शामिल हुए इस अवसर अमरपुर पदस्थ डॉक्टर शिव प्रजापति, अमरपुर चौकी स्टाफ पुष्पराज सिंह, प्रधान आरक्षक गौरव तिवारी,विनोद ठाकुर,पवन सागर,पवन निगवान,आनूप गुर्जर,साथ के ग्राम रक्षा समिति राजर्षि मिश्रा, मधुर चंद्र गुप्ता,जवाहर सोनी, राजेन्द्र गुप्ता, महेंद्र सिंह, दिनेश गुप्ता,किशन सोनी, रामजी सोनी, रमाकांत तिवारी,हरिओम गुप्ता, बृजेश गुप्ता प्रशांत सोनी अखिलेश मिश्रा, विनोद द्विवेदी,सहित अन्य लोगों की शांति व्यवस्था बनाने में सराहनीय योगदान रहा।





