नसीमखान सांची
सांची,,,भगवान बुद्ध के प्रधान शिष्यों सारिपुत्त और महामोग्गलान के पवित्र अस्थि कलश मंगोलिया से वापस सांची लाए गए। इन पवित्र अवशेषों को सांची स्थित चेतियागिर विहार में विधिवत पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों के बाद पुनः ससम्मान स्थापित कर सुरक्षित रखा गया।
अस्थि कलश को भोपाल एयरपोर्ट पर पूरे सम्मान के साथ प्राप्त किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, संस्कृति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ल सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। सभी ने पवित्र कलश के दर्शन किए तथा श्रीलंका महाबोधि सोसायटी के अध्यक्ष वेनेगल उपतिस्स नायक थेरो के साथ इसे सम्मानपूर्वक सांची के लिए रवाना किया।
इस अवसर पर मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि भगवान बुद्ध का शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश भारत से निकलकर चीन सहित दक्षिण-पूर्व एशिया के अनेक देशों तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि बुद्ध की शिक्षाएं आज भी विश्व को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखा रही हैं।
महाबोधि सोसायटी के अध्यक्ष वेनेगल उपतिस्स नायक थेरो ने अस्थि कलश को पूर्ण सुरक्षा और सम्मान के साथ मंगोलिया ले जाकर पुनः सांची लौटाने की व्यवस्था के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बौद्ध देशों में इन पवित्र अवशेषों के दर्शन को लेकर विशेष श्रद्धा और उत्साह देखा जा रहा है। साथ ही उन्होंने भारत सरकार एवं मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना की।
प्रदेश सरकार की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि भविष्य में इन पवित्र अस्थि कलशों को अन्य बौद्ध देशों में भी दर्शनार्थ ले जाने की योजना है।
उल्लेखनीय है कि यह अस्थि कलश भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से दिल्ली लाया गया था, जहां राष्ट्रीय संग्रहालय में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के साथ आमजन के दर्शन हेतु रखा गया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संघ (आईबीसी) के डायरेक्टर कर्नल यश सक्सेना तथा राष्ट्रीय संग्रहालय के निदेशक विमल कुमार द्वारा इसे गुवाहाटी होते हुए दिल्ली लाया गया। इस यात्रा के दौरान लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना भी विमान में उपस्थित रहे।
सांची से मंगोलिया और पुनः सांची तक की संपूर्ण यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के उप सचिव राजेश गुप्ता साथ रहे। वहीं भोपाल एयरपोर्ट पर संस्कृति विभाग के निदेशक एन.पी. नामदेव तथा कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं सांची विश्वविद्यालय के सहायक निदेशक (विधि) रविंद्र सिंह ठाकुर ने समस्त व्यवस्थाओं का संचालन करते हुए अस्थि कलश को सम्मानपूर्वक सांची में पुनर्स्थापित कराया।
सांची में पवित्र अस्थि कलशों की पुनर्स्थापना ने एक बार फिर इस ऐतिहासिक धरोहर नगरी को वैश्विक बौद्ध आस्था के केंद्र के रूप में स्थापित किया।





