नसीमखान सांची
उलानबटार में दर्शनार्थ रखे गए सारिपुत्त एवं महामोग्गलान के अस्थि कलश पारंपरिक अनुष्ठान के बाद पुनः चेतियागिर विहार में स्थापित होंगे।
साँची,, भगवान बुद्ध के प्रधान शिष्यों सारिपुत्त एवं महामोग्गलान के पवित्र अस्थि कलश गुरुवार को मंगोलिया से पुनः साँची लौटेंगे। ये अस्थि कलश साँची स्थित चेतियागिर विहार में संरक्षित हैं, जिन्हें विशेष धार्मिक कार्यक्रम के तहत दर्शनार्थ मंगोलिया ले जाया गया था।
जानकारी के अनुसार, श्रीलंका महाबोधि सोसायटी के अध्यक्ष एवं लंकाजी टेंपल जापान के मुख्य संघनायक वेनेगल उपतिस्स नायक थेरो तथा राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली के पदाधिकारियों द्वारा 30 मई को अस्थि कलश दिल्ली से मंगोलिया ले जाए गए थे। मंगोलिया की राजधानी उलानबटार स्थित गंडन तेगचेनलिंक मठ में इन्हें 9 जून तक आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा गया।
धार्मिक कार्यक्रम पूर्ण होने के बाद अब इन पवित्र अस्थि कलशों को पुनः साँची लाया जा रहा है, जहां चेतियागिर विहार में पारंपरिक पूजा-अर्चना एवं विधि-विधान के साथ पुनः स्थापित किया जाएगा।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अस्थि कलश गुरुवार दोपहर दिल्ली से भोपाल लाए जाएंगे तथा वहां से सुरक्षा व्यवस्था के बीच साँची रवाना किए जाएंगे। अस्थि कलशों को पुनः साँची लाने के लिए साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के रविन्द्र सिंह ठाकुर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं कुलसचिव प्रो. रामनिवास गुप्ता ने आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
साँची में पवित्र अस्थि कलशों की वापसी को लेकर श्रद्धालुओं एवं बौद्ध अनुयायियों में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण दिखाई दे रहा है।





