मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में संदीपनि विद्यालय के छात्र स्कूल बसों की कमी के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली से स्कूल पहुंच रहे हैं। वायरल तस्वीरों ने ग्रामीण शिक्षा और छात्र सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पढ़ें लाइव खबर इंडिया की विशेष रिपोर्ट।
रिपोर्ट: नाजिर अली ( Live khabar india )
विदिशा। मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संदीपनि विद्यालय योजना शुरू की थी। इस योजना का मकसद केवल बेहतर शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि दूर-दराज़ के गांवों से आने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी था। लेकिन विदिशा जिले से सामने आई तस्वीरों ने इस व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिले के नटेरन स्थित संदीपनि विद्यालय में पढ़ने वाले कई छात्र इन दिनों ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। स्कूल बसों की कमी और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने के कारण अभिभावकों ने मजबूरी में यह विकल्प चुना है। हालांकि उनका कहना है कि वे बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने देना चाहते, लेकिन सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता लगातार बनी हुई है।
सरकारी योजना का उद्देश्य और जमीनी स्थिति
संदीपनि विद्यालयों की स्थापना ग्रामीण प्रतिभाओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए की गई थी। इसके तहत विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ पढ़ाई और परिवहन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था।
लेकिन विदिशा में कई गांवों से आने वाले विद्यार्थियों को अब स्कूल तक पहुंचने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का सहारा लेना पड़ रहा है। सुबह के समय ट्रॉली में बैठकर स्कूल जाते बच्चों के दृश्य स्थानीय लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बने हुए है
अभिभावकों की मजबूरी
बच्चों के परिजनों का कहना है कि पहले सरकारी वाहन गांव तक आते थे, लेकिन अब नियमित परिवहन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उनके सामने दो ही विकल्प हैं—या तो बच्चों की पढ़ाई छुड़वा दें या फिर किसी वैकल्पिक साधन से उन्हें स्कूल भेजें।
अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों का भविष्य सुरक्षित देखना चाहते हैं, लेकिन ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे साधनों से रोजाना सफर कराना उनकी मजबूरी है, पसंद नहीं।
बच्चों का हौसला बरकरार
परिस्थितियां कठिन होने के बावजूद छात्र पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं। उनका कहना है कि शिक्षा उनके भविष्य का आधार है और वे किसी भी हाल में पढ़ाई नहीं छोड़ना चाहते। हालांकि वे भी चाहते हैं कि सरकार सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था उपलब्ध कराए ताकि उन्हें जोखिम भरा सफर न करना पड़े।
पहले नदी, अब ट्रॉली—लगातार सामने आ रहे सवाल
विदिशा में यह पहला मामला नहीं है जिसने ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर किया हो। कुछ दिन पहले जिले के एक गांव से स्कूली बच्चों का नदी पार कर स्कूल जाने का वीडियो सामने आया था, जिसने प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए थे।
अब ट्रैक्टर-ट्रॉली में स्कूल पहुंचते विद्यार्थियों की तस्वीरों ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और सुलभ शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा व्यवस्थाएं पर्याप्त हैं।
शिक्षा विभाग का क्या कहना है?
जिला शिक्षा विभाग का कहना है कि संदीपनि विद्यालयों के लिए उपलब्ध वाहनों की संख्या सीमित है। विभाग के अनुसार उपलब्ध संसाधनों के आधार पर परिवहन व्यवस्था संचालित की जा रही है और आवश्यकता के अनुसार व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।
हालांकि, जमीनी स्तर पर सामने आ रही तस्वीरें यह संकेत देती हैं कि कई विद्यार्थियों को अभी भी सुरक्षित परिवहन सुविधा का इंतजार है।
बड़ा सवाल
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार केवल स्कूल भवन बनाने तक सीमित नहीं हो सकता। यदि विद्यार्थियों को सुरक्षित तरीके से स्कूल तक पहुंचाना संभव नहीं होगा, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। विदिशा की यह तस्वीरें प्रशासन और नीति निर्माताओं के सामने एक अहम सवाल खड़ा करती हैं—क्या प्रदेश का भविष्य सुरक्षित परिवहन का हकदार नहीं है?




