रिपोर्ट : नाजिर अली ( live khabar india)
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम अब केवल खेल गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि हजारों युवाओं की आवाज का मंच बन चुका है। दिन-रात छात्र खुले आसमान के नीचे डटे हुए हैं और सरकार से अपनी मांगों पर स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं।
पिछले कई दिनों से चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र शामिल हैं। आंदोलन का मुख्य मुद्दा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने से जुड़ा है। छात्रों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन में दो गुट, लेकिन मांगें लगभग समान
आंदोलन के दौरान छात्रों के बीच रणनीति को लेकर अलग-अलग विचार सामने आए हैं, जिसके चलते आंदोलन दो हिस्सों में बंटा दिखाई दे रहा है। हालांकि दोनों समूहों का कहना है कि उनका उद्देश्य एक ही है—भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता और अभ्यर्थियों को न्याय दिलाना।
एक पक्ष आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक समर्थन के साथ आगे बढ़ा रहा है, जबकि दूसरा समूह पूरी तरह छात्र नेतृत्व में शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने की बात कर रहा है।
भूख हड़ताल भी जारी
आंदोलन के बीच कुछ छात्र नेताओं ने आमरण अनशन का रास्ता भी अपनाया है। खुले मैदान में बारिश और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अनशन जारी है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य की है।
अनशन पर बैठे छात्रों का कहना है कि सरकार यदि समय रहते सकारात्मक पहल नहीं करती तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
सरकार से वार्ता की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार से जल्द वार्ता कर समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता तो आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जा सकता है।
छात्रों का यह भी कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया युवाओं का अधिकार है और इसके लिए वे लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
प्रशासन की नजर आंदोलन पर
रांची प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। स्टेडियम और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। फिलहाल आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है और प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।
क्या है आगे की राह?
आंदोलन की दिशा अब सरकार की अगली पहल पर निर्भर करेगी। यदि वार्ता के जरिए समाधान निकलता है तो प्रदर्शन समाप्त हो सकता है, लेकिन यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम युवाओं के संघर्ष और उम्मीदों का प्रतीक बन गया है।




