रिपोर्टर |नाजिर अली |Live khabar india
विदिशा। मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी विधेयक 2026 को लेकर विरोध के स्वर सामने आए हैं। विदिशा में मुस्लिम समाज के लोगों और महिलाओं ने कलेक्टोरेट पहुंचकर विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर आपत्ति जताई। समाज की ओर से राष्ट्रपति के नाम डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए यूसीसी विधेयक को वर्तमान स्वरूप में वापस लेने अथवा इसके प्रावधानों पर रोक लगाने की मांग की गई।
बुधवार दोपहर करीब 12:30 बजे मुस्लिम समाज की महिलाएं और अन्य लोग कलेक्टोरेट कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने यूसीसी विधेयक को लेकर अपनी चिंताएं प्रशासन के सामने रखीं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विधेयक के कुछ प्रावधान मुस्लिम समाज के पर्सनल लॉ और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।
ज्ञापन में विशेष रूप से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और वसीयत जैसे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े प्रावधानों पर आपत्ति जताई गई। मुस्लिम समाज की ओर से कहा गया कि इन विषयों का संबंध लंबे समय से चली आ रही धार्मिक और व्यक्तिगत परंपराओं से है, इसलिए कानून में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले संबंधित समुदायों की राय लेना जरूरी है।
समाज की मांग है कि यूसीसी को लागू करने से पहले सभी धार्मिक समुदायों, कानून विशेषज्ञों और इससे प्रभावित होने वाले पक्षों के साथ व्यापक स्तर पर चर्चा की जाए। ज्ञापन में कहा गया कि कानून बनाने की प्रक्रिया में संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रावधानों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से यूसीसी विधेयक 2026 को उसके वर्तमान स्वरूप में वापस लेने की मांग की। साथ ही जब तक सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श नहीं हो जाता, तब तक विधेयक के प्रावधानों पर रोक लगाने की मांग भी रखी गई।
इस दौरान कलेक्टोरेट परिसर में मुस्लिम समाज की महिलाएं भी मौजूद रहीं। महिलाओं ने कहा कि व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े किसी भी बदलाव का असर सीधे परिवार और सामाजिक व्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए ऐसे कानून पर निर्णय लेने से पहले प्रभावित समुदाय की बात सुनी जानी चाहिए।
मुस्लिम समाज द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के बाद अब इस मुद्दे को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी। वहीं, यूसीसी को लेकर समर्थन और विरोध के बीच आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है।





