रिपोर्ट : नाजिर अली |Live khabar india
विदिशा। शमशाबाद में गल्ला व्यापारियों और मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की शाखा प्रबंधक पर एफआईआर के बाद अब पूरे मामले में नया मोड़ सामने आया है। प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। गल्ला व्यापारी मनु माहेश्वरी ने मीडिया के सामने दस्तावेज पेश कर दावा किया है कि जब्त किया गया गेहूं सरकारी नहीं, बल्कि इसी साल शमशाबाद मंडी में किसानों से खरीदा गया था।
व्यापारी का कहना है कि गेहूं की खरीद से संबंधित उनके पास बिल और अन्य वैध दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने प्रशासन पर दस्तावेजों और पूरे मामले की पर्याप्त जांच किए बिना एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
18 अगस्त को सिरोंज में पकड़ा गया था ट्रक
मामला 18 अगस्त से शुरू हुआ, जब प्रशासन ने सिरोंज में सरकारी बारदाने के टैग लगी करीब 580 बोरियों से भरा एक ट्रक जब्त किया था। इसके अगले दिन 19 अगस्त को शमशाबाद मंडी से करीब 600 बोरी गेहूं से भरा एक अन्य ट्रक पकड़ा गया।
दोनों मामलों में प्रशासन की ओर से कार्रवाई करते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
व्यापारी का दावा- मंडी से किसानों से खरीदा था गेहूं
मामले में आरोपी बनाए गए व्यापारी मनु माहेश्वरी का दावा है कि गेहूं की खरीद शमशाबाद मंडी से किसानों से की गई थी। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की शमशाबाद शाखा प्रबंधक वंदना बघेल की लिखित डिमांड के आधार पर गेहूं को कुरवाई भेजा जा रहा था।
व्यापारी के मुताबिक कुरवाई में सैंपल जांच के दौरान गेहूं में मिट्टी पाए जाने के बाद उसे ग्रेडिंग और सफाई के लिए सिरोंज भेजा गया था। इसी दौरान प्रशासन ने ट्रक को रोककर गेहूं को सरकारी गेहूं मानते हुए जब्त कर लिया।
2022-23 के बारदाने के टैग पर भी उठे सवाल
कार्रवाई के दौरान बारदाने पर वर्ष 2022-23 के टैग होने का मुद्दा भी सामने आया है। इस पर व्यापारी का कहना है कि इस्तेमाल किया गया बारदाना पुराना है और बाजार में आसानी से उपलब्ध है। केवल बारदाने पर पुराने टैग लगे होने के आधार पर गेहूं को सरकारी बताना उचित नहीं है।
मनु माहेश्वरी ने पूरे मामले में कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उनके द्वारा पेश किए गए खरीद संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाए तो गेहूं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
नगर परिषद अध्यक्ष ने कार्रवाई को बताया राजनीति से प्रेरित
शमशाबाद नगर परिषद अध्यक्ष भारती माहेश्वरी ने भी अपने बेटे मनु माहेश्वरी पर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। उनका आरोप है कि कुछ लोग राजनीतिक कारणों से परिवार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वेयरहाउसिंग शाखा प्रबंधक ने भी कार्रवाई पर उठाए सवाल
इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की शमशाबाद शाखा प्रबंधक वंदना बघेल की भूमिका भी सामने आई है। शाखा प्रबंधक के मुताबिक उनकी डिमांड पर ही गेहूं को कुरवाई भेजा गया था।
वंदना बघेल का कहना है कि इस संबंध में 16 अगस्त को ही वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित सूचना दे दी गई थी। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को जल्दबाजी में की गई और एकतरफा कार्रवाई बताया है।
अब दस्तावेजों की जांच पर टिकी नजर
शमशाबाद गेहूं कांड में अब व्यापारी और वेयरहाउसिंग शाखा प्रबंधक की ओर से सामने रखे गए दस्तावेज और दावे जांच का अहम हिस्सा बन सकते हैं। एक तरफ प्रशासन ने गेहूं को सरकारी बताकर कार्रवाई की है, वहीं दूसरी तरफ व्यापारी का दावा है कि गेहूं किसानों से मंडी में वैध तरीके से खरीदा गया था।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच के बाद प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या पहले की गई कार्रवाई की पुनर्जांच होती है।






