रिपोर्ट : अजय अहिरवार |Live Khabar india
भोपाल। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा ﷺ की विलादत की खुशी में मनाए जाने वाले ईद मिलादुन्नबी के मुबारक अवसर पर राजधानी भोपाल में 26 अगस्त 2026 को भव्य एवं पारंपरिक जुलूस निकाला जाएगा। मध्यप्रदेश मुस्लिम त्योहार कमेटी के नेतृत्व में आयोजित होने वाले इस जुलूस को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। कमेटी के मुताबिक जुलूस में 20 घोड़े, 10 सजी हुई बग्गियां, 40 ढोल और 5 डीजे शामिल होंगे। इसके साथ ही भोपाल के अलग-अलग क्षेत्रों के विभिन्न अखाड़े भी अपनी टीमों के साथ जुलूस में शिरकत करेंगे।
अमन, मोहब्बत और भाईचारे का दिया जाएगा संदेश
मध्यप्रदेश मुस्लिम त्योहार कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता जीशान रहमान ‘शानू’ ने बताया कि ईद मिलादुन्नबी मुस्लिम समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण और मुबारक अवसर है। इस दिन पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद ﷺ की विलादत की खुशी मनाई जाती है और उनके जीवन, सीरत तथा इंसानियत के लिए दिए गए संदेश को याद किया जाता है।
उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ ने इंसानियत, रहमदिली, अमन, भाईचारे, न्याय और आपसी मोहब्बत की शिक्षा दी। इसलिए ईद मिलादुन्नबी का अवसर केवल खुशी मनाने का ही नहीं, बल्कि उनके बताए रास्ते पर चलने और समाज में प्रेम, शांति तथा सद्भाव को मजबूत करने का संदेश भी देता है।
घरों और मस्जिदों में होंगे धार्मिक आयोजन
ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर शहर में घरों और मस्जिदों में मिलाद, नात, दरूद-ओ-सलाम और दुआ की महफिलें आयोजित की जाती हैं। लोग अपने घरों और धार्मिक स्थलों को सजाते हैं। इसके साथ ही जरूरतमंदों की मदद, गरीबों को भोजन कराने और इंसानियत की सेवा जैसे नेक कार्य भी किए जाते हैं।
कमेटी के मुताबिक इस आयोजन का मूल संदेश मोहब्बत, रहमदिली, अमन और भाईचारे को बढ़ावा देना है।
जुलूस में 20 घोड़े और 10 बग्गियां रहेंगी खास आकर्षण
भोपाल में इस बार ईद मिलादुन्नबी के जुलूस को विशेष रूप से भव्य स्वरूप देने की तैयारियां की जा रही हैं। जुलूस में 20 घोड़े और 10 सजी हुई बग्गियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अलावा 40 ढोल और 5 डीजे भी जुलूस का हिस्सा होंगे।
शहर के विभिन्न इलाकों से आने वाले अखाड़े भी जुलूस में शामिल होंगे। अखाड़ों की भागीदारी से जुलूस में पारंपरिक रंग और उत्साह देखने को मिलेगा।
ये अखाड़े होंगे शामिल
जुलूस में हजरत बिलाल अखाड़ा, काजी कैंप का नूरानी रोशन अखाड़ा, मंगलवारा का अली अखाड़ा, मंगलवार छावनी का न्यू इंडियन अखाड़ा, काजी कैंप का एवेन राइन अखाड़ा, बाग उमरावदुल्ला का रोशन आजाद अखाड़ा और गांधी नगर का गांधी नगर अखाड़ा शामिल रहेंगे।
इत्तवारा चौराहे से शुरू होगा जुलूस
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार ईद मिलादुन्नबी का जुलूस 26 अगस्त 2026 को दोपहर 1 बजे इत्तवारा चौराहे से शुरू होगा।
इसके बाद जुलूस इस्लामपुरा, बैंड मास्टर चौराहा, बुधवारा, कुलसुम बी की मस्जिद, कोतवाली रोड और मोती मस्जिद सहित निर्धारित मार्गों से होते हुए इमामी गेट पहुंचेगा।
जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए कमेटी की ओर से प्रशासन और पुलिस से सहयोग की अपील की गई है।
इमामी गेट पर होगी विशेष दुआ
जुलूस के समापन अवसर पर इमामी गेट पर देश और प्रदेश की खुशहाली, अमन-चैन, शांति और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआ की जाएगी।
कमेटी का कहना है कि ईद मिलादुन्नबी का आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज में मोहब्बत, इंसानियत और सामाजिक सद्भाव का संदेश देने का माध्यम भी बनेगा।
प्रशासन से अनुमति मांगी
मध्यप्रदेश मुस्लिम त्योहार कमेटी की ओर से जुलूस के आयोजन के लिए प्रशासन से आवश्यक अनुमति मांगी गई है। कमेटी ने प्रशासन को जुलूस के प्रस्तावित समय और मार्ग की जानकारी देते हुए शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित आयोजन के लिए अनुमति प्रदान करने का आग्रह किया है।
कमेटी की ओर से प्रशासन और पुलिस को पूर्ण सहयोग देने की बात भी कही गई है।
शानू ने की अनुशासन बनाए रखने की अपील
प्रदेश प्रवक्ता जीशान रहमान ‘शानू’ ने कहा कि भोपाल की पहचान हमेशा से आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब के लिए रही है। ईद मिलादुन्नबी का जुलूस इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अमन, मोहब्बत और भाईचारे का संदेश देगा।
उन्होंने जुलूस में शामिल होने वाले सभी लोगों से अनुशासन बनाए रखने, प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील की।
जीशान रहमान ‘शानू’ ने शहरवासियों को ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद देते हुए कहा कि यह मुबारक अवसर पूरी इंसानियत के लिए मोहब्बत, रहमदिली, शांति और भाईचारे का संदेश लेकर आए तथा देश में अमन और खुशहाली कायम रहे।
ईद मिलादुन्नबी की परंपरा का ऐतिहासिक संदर्भ
ईद मिलादुन्नबी की परंपरा के इतिहास को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक विवरण मिलते हैं। उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों में पैगंबर हजरत मोहम्मद ﷺ की विलादत की सार्वजनिक स्मृति के शुरुआती बड़े आयोजनों का उल्लेख फातिमी शासनकाल के मिस्र में मिलता है। बाद के दौर में यह परंपरा विभिन्न मुस्लिम क्षेत्रों तक पहुंची और अलग-अलग देशों में स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार मिलाद मनाने की परंपराएं विकसित हुईं।
इतिहास में 1207 ईस्वी में उत्तरी इराक के अरबल में आयोजित एक बड़े सार्वजनिक मिलाद का भी उल्लेख मिलता है। समय के साथ यह परंपरा दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंची और स्थानीय परंपराओं के अनुरूप इसके आयोजन होने लगे।





