नसीम खान
सांची,,,लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खाद्य पदार्थों से लेकर पेट्रोल-डीजल, बस किराए और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के बढ़ते दामों ने लोगों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। हालात यह हैं कि लोगों के सामने अब यह सवाल खड़ा होने लगा है कि क्या खाएं और क्या छोड़ें। आने वाले त्योहार भी महंगाई के बोझ तले फीके पड़ते दिखाई दे रहे हैं।
जानकारी के अनुसार बाजार में सब्जियों, फलों, दाल, चावल, तेल, गुड़ सहित तमाम खाद्य पदार्थों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। हाल ही में शक्कर के दामों में भी अचानक हुई बढ़ोतरी ने लोगों को चिंता में डाल दिया है। लोगों का कहना है कि पहले से ही सीमित आय में घर चलाना मुश्किल था, वहीं लगातार बढ़ते दामों ने अब त्योहारों की खुशियों पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।
महंगाई का असर केवल खाद्य पदार्थों तक सीमित नहीं है। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के कारण वाहन चलाना भी महंगा हो गया है। वहीं बस किराए में बढ़ोतरी से आवागमन का खर्च भी बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि हर तरफ बढ़ते खर्च के कारण मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
महंगाई को लेकर लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी भी दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि त्योहारों के दौरान जहां परिवार खुशियां मनाने की तैयारी करते हैं, वहीं इस बार बढ़ती कीमतों ने अतिरिक्त आर्थिक बोझ खड़ा कर दिया है। लोगों ने सरकार से रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के दामों पर नियंत्रण करने की मांग की है।
अंकित मेहतो, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सांची ने कहा कि सरकार पूरी तरह महंगाई पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हुई है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार लगातार महंगाई की मार झेल रहे हैं और सरकार का इस पर कोई प्रभावी नियंत्रण दिखाई नहीं दे रहा है।
आर.एस. यादव, सपा नेता सांची ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है। रोजमर्रा की खाद्य सामग्री, बस किराए और हाल ही में शक्कर के दामों में हुई बढ़ोतरी से साफ है कि महंगाई सरकार के नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। अब लोग भगवान भरोसे रह गए हैं।
कमलेश पासी, मध्यमवर्गीय दुकानदार ने कहा कि खाद्य पदार्थों से लेकर फल, दवाइयां, बस किराया और पेट्रोल-डीजल तक सब कुछ महंगा हो रहा है। महंगाई की सबसे अधिक मार मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रही है। शक्कर और गुड़ के बढ़ते दामों ने भी लोगों को परेशान कर दिया है। ऐसी स्थिति में आने वाले त्योहार भी अब लोगों पर बोझ बनते दिखाई दे रहे हैं। सरकार को आवश्यक वस्तुओं के दाम कम करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
महंगाई की मार ने त्योहारों की चमक फीकी कर दी है, अब लोगों को राहत के लिए सरकारी कदमों का इंतजार है।





