वसीम कुरैशी रिपोर्टर
रायसेन।शहर के संस्कार बिहार स्थित मंदिरमें रक्षाबंधन के अवसर पर पुजारी और पंडित के कार्य करने वाले ब्राह्मणों ने श्रावणी उपाकर्म पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया। ब्राह्मणों ने विधि विधान से पूजन अर्चन कर जनेऊ परिवर्तन किया।
बुधवार को बेतवा नदी में स्नान करने के बाद संस्कार बिहार मन्दिर में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर श्रावणी उपाकर्म के अंतर्गत ब्राह्मणों ने विधि विधान से अपने जनेऊ बदले। रायसेन शहर और आसपास के जगहों के वेदोक्त ब्राह्मण जो पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्य अन्य कारोबार करते हैं। ब्राह्मणों के अनुसार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर श्रावणी उपाकर्म का के दिन विशेष स्नान जिसे 10 विधि स्नान किया जाता है।
इसके साथ सप्त ऋषियों की पूजा अर्चना होती है और जनेऊ परिवर्तन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि साल भर के दौरान पूजा पाठ में जाने अनजाने हुई गलतियों और पाप कर्म को नष्ट करने के लिए श्रावणी उपक्रम किया जाता है। बताया गया कि इस दिन गुरु के सानिध्य में ब्रह्मचारी गाय के दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र तथा कुशा स्नान कर वर्षभर में जाने-अनजाने में हुए पापकर्मों का प्रायश्चित कर जीवन को सकारात्मकता से भरते हैं।इस धार्मिक अनुष्ठान में पण्डित नरेश चंद चतुर्वेदी पण्डित कमलेश चतुर्वेदी, पण्डित राजेंद्र दुबे सोमवारा वाले, पण्डित रामबाबू शर्मा,संघर्ष शर्मा एडवोकेट,गिरजेश चतुर्वेदी संदीप दुबे,बद्री प्रसाद पाराशर आदि शामिल हुए।
नसीम खान संपादक






