7 साल में भी नहीं बन सकी सड़क ग्रामीण हो रहे परेशान

राघवेन्द्र श्रीवास्तव सुल्तानपुर

सुल्तानपुर। आदीवासी बाहुल्य क्षेत्र साढ़े बारह गांव के चुरका से चूना कुंडा तक एक साल में बनने वाली सड़क का निर्माण कार्य 7 साल बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि यहा से वाहन तो दूर पैदल निकलना भी दुभर हो रहा है। सड़क की हालत बद से बदतर होने के कारण ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा है। अंदर खाने के सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण सड़क निर्माण को लेकर आगामी चुनाव में बहिष्कार भी कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य होने के साथ साथ जंगली इलाका है। यहां के किसान खेती और मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते है।, लेकिन बारिश में इनकी परेशानी दो गुनी बढ़ जाती है एक सड़क की हालत खराब दूसरी बारिश में कीचड़ के कारण आवागमन बंद सा हो जाता है। जैसे तैसे ग्रामीणों को प्रधानमंत्री सड़क से 3 जुड़ने का मौका मिला तो निर्माण एजेंसी की लापरवाही की भेंट यह सड़क चढ़ गई। परिणाम स्वरुप ग्रामीणों को अब तक सड़क का लाभ ही नहीं मिल सका और उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। उल्लेखनीय है कि केंद्र शासन की ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत करीब 7.90 किलोमीटर निर्माण की स्वीकृति मिली थी, जिसे चुरका से चुना कुंडा तक बनाई जाना थी। जिसकी लागत 4 करोड़ 48 लाख 71 हजार रुपए थी, वहीं निर्माण के बाद सड़क के 5 वर्ष तक रखरखाव के लिए 17.64 लाख राश स्वीकृति मिली थी, लेकिन 7 साल काम चलने के बाद भी सड़क नहीं बन सकी है।
2017 में निर्माण कार्य करना था पूर्ण
यहां पर लगे बोर्ड के मुताबिक इस सड़क निर्माण की शुरुआत 12 अगस्त 2016 में हुई जिसे 27 अगस्त 17 तक बनाकर पूर्ण करना था, लेकिन समय अवधि में तो यह सड़क नहीं बन सकी, बल्कि 7 साल तक लगातार अगस्त 2023 तक यहां पर काम चलता रहा। जनपद सदस्य प्रतिनिधि अनिल करपे ने बताया कि हम यह कार्य लगभग 5-7 साल से देख रहे हैं कि यहां सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है पर यह सड़क बनते बनते ही पूरी उखड़ गई है जहां देखो वहां गिट्टी निकलते देखी जाती है और अब तो सड़क पर धूल उड़ने लगी है। स्थिति यह है कि निर्माण अवधि के साथ रखरखाव की अवधि भी समाप्त हो गई लेकिन सड़क नहीं बन सकी।
ग्रामीणों की खुशियों पर फिर पानी
जनपद सदस्य ललता आदिवासी , उपसरपंच पतिराम चनाकुडा, पंच पुरुषोत्तम आदिवासी, सामाजिक कार्यकर्ता सचिन बारिवा, मोहन दीवार आदि ने बताया कि हम ग्रामीण बरसों से कीचड़ एवं गंदगी में जी रहे थे, लेकिन जैसे ही हमें मालूम हुआ की हमारे गांव की सड़क बनने वाली है तो हम ग्रामीणों का खुशी का ठिकाना नहीं रहा, लेकिन हमें क्या मालूम था कि हमारी खुशी कुछ दिन की है और हमारी स्थिति पहले से भी बदतर हो जाएगी। अभी स्थिति यह है कि यदि हम इस सड़क पर गिर जाते हैं तो गंभीर घायल हो जाते हैं क्योंकि जगह-जगह गिट्टी निकलने से आए दिन घटना दुर्घटना सामने हो रही हैं। ग्रामीणों ने कहा कि हमें ऐसी सड़क मिलना थी तो हम ग्रामीण पहले ही अच्छे थे।
अफसरों ने आंख बंद कर किया मूल्याकंन
ग्रामीण पुरुषोत्तम, सचिन मोहन दीवार ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का काम देख रहे अफसरों पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस सड़क का निर्माण लगभग 7 वर्ष से चल रहा है। जो सड़क बनते बनते ही उखड़ गई और इस पर फिर कार्य शुरू हो गया। जो अफसर इस सड़क का मूल्याकंन कर रहे हैं,उन्होंने भी आंख बंद कर मूल्याकंन कर दिया यही वजह है कि ठेकेदार ने मनमर्जी से काम करता रहा। ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग सड़क बनने की खुशी भी एक दूसरे से नहीं बांट पाए थे सड़क पर धूल उड़ने लगी।
सड़क गायब अब सिर्फ बोर्ड ही
लाखों रुपए निर्माण की सड़क पर सिर्फ अब निर्माण एजेंसी का बोर्ड ही नजर आता है जो अपनी कहानी स्वयं बयां कर रहा है, जिस पर रोड की लंबाई कितनी लागत कब से शुरू हुई और कब तक बनेगी यही अंकित नजर आ रही है, बोर्ड पर ठेकेदार का नाम विमल त्यागी अंकित है जिसे आज तक मौके पर नहीं देखा गया।
एक महीने पहले थी बेहतर
यह रोड सन 2016-17 में बनकर पूर्ण होना था, 5 वर्ष का इसमें रखरखाव है। वह कर हो रहा होगा, और में इस क्षेत्र का एक माह पहले ही दौरा किया था तब तो सड़क बेहतर थी,यदि कहीं कुछ खराबी है तो जाकर देखता हूं।
प्रदीप भार्गव , इंजीिनयर

नसीम खान संपादक

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