सांची विश्वविद्यालय में मना महिला दिवस• पूरक है, प्रतिस्पर्धी नहीं महिलाएं-कुलगुरु प्रोफेसर लाभ

नसीम खान

• विवि की महिला कर्मचारियों का हुआ सम्मान

सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कार्यक्रम में महिला कर्मचारियों का सम्मान किया गया। कुलगुरु प्रो वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि महिलाएं पूरक है ना कि प्रतिस्पर्धी और परिवार और समाज को जोड़ने वाली शक्ति है महिलाएं। उन्होने कहा कि विवाह संस्कार में दोनों बराबर है ना कि कोई छोटा और बड़ा। प्रो लाभ ने मिथिला की एक विवाह परम्परा चतुर्थी का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां शादी के 4 दिन बाद तक वधू को पति को परखने का मौका होता है और अगर चौथे दिन वह मना कर देते तो विवाह पूरा नहीं माना जाता। लड़की के हां कहने पर दुबारा फेरे होते है और विवाह सम्पन्न होता है। उन्होने कहा कि वेदकालीन भारत महिलाओं को सम्मान देने के कारण ही इतना महान बन पाया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सम्राट अशोक तकनीकी संस्थान विदिशा की प्रोफेसर डॉ रश्मि जैन ने कहा कि महिलाएं समाज को दिशा दिखाती है। उन्होने कहा कि आज संवेदनाएं खत्म हो रही है और ऐसे में महिलाओं के प्रति समाज को नजरिया बदलना होगा। कुलसचिव प्रोफेसर अलकेश चतुर्वेदी ने कहा कि संपूर्ण इतिहास नारी शक्ति की गाथाओं से भरा हुआ है। उन्होने कहा कि अब तो महिला योद्धाओं के पुरातात्विक अवशेष भी प्राप्त हो रहे हैं। भारतीय चेतना के परिप्रेक्ष्य में महिला शक्ति का स्वरुप है और उनके बिना शिव भी शव रह जाते हैं।
इस अवसर पर डॉ ऋतु श्रीवास्तव ने कविता मां तुम ऐसी क्यों हो सुनाई। शोधार्थी मोनिका पटेल ने कविता सुनाई ‘हां मैं नारी हूं, सभी पुरुषों पर भारी हूं। जो रखता मान मेरा करती उसकी रखवाली हूं। ‘ विभा शर्मा ने माता सीता के द्वंद और उनके जीवन चरित्र पर कविता सुनाई । शोधार्थी ममता चौधरी ने शाक्त तंत्र में महिला शक्ति साधना पर चर्चा करते हुए तंत्र में महिलाओं के बारे में विचार रखे। कई अन्य शोधार्थियों ने भी कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ अंजलि दुबे द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन देते हुए प्रोफेसर नवीन मेहता ने कार्यक्रम की भूमिका को समेटते हुए कहा कि मां है तो खुशियों की बरसात है, मां है तो जीवन आबाद है।

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