नसीमखान
रायसेन,
शासन के निर्देशानुसार जेण्डर आधारित हिंसा की रोकथाम हेतु कलेक्टर श्री अरविंद दुबे के निर्देशानुसार 25 नवंबर से 10 दिसम्बर तक संचालित किए जा रहे हम होंगे कामयाब पखवाड़ा के तहत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गुरूवार को रायसेन स्थित प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय में हानिकारक रुढिवादिता को चुनौति देने एवं सकारात्मक पुरुषत्व विषय पर संवाद परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में महिला बाल विकास विभाग के सहायक संचालक श्री संजय गहरवाल द्वारा छात्र-छात्राओं से सकारात्मक पुरुष विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने महिलाओं के उत्थान और पतन की सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर वर्तमान तक पूरी ऐतिहासिक यात्रा पर चर्चा की गई। किस प्रकार पितृसत्ता और लिंगभेद के आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव और शोषण हुआ है। उनके साथ लिंग भेद के आधार पर पुरुषों द्वारा किए जा रहे भेदभाव पर प्रकाश डाला और उपस्थित पुरुषों और बालकों से अनुरोध किया कि लिंगभेद या घरेलू हिंसा जैसे मसलों में उलझकर जीवन को संकट में नहीं डालना चाहिए। भगवान ने महिला पुरुष दोनों को समान रुप से बनाया, ईश्वर ने लिंग भेद नहीं किया है तो हम क्यों कर रहे हैं। किसी भी काम को महिला पुरुष के आधार पर बांट कर हम विवादों में पड़ जाते हैं। हमें सकारात्मक पुरुषत्व के विकास की जरुरत है, लिंग भेद के आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव से बचना चाहिए। महिलाओं को घरेलू पारिवारिक कार्यो में सहयोग करना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए। इससे परिवार में प्रेम और खुशहाली बढेगी।
कार्यक्रम में टीआई महिला सेल से पूनम सविता द्वारा बताया गया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाए गए हैं। किंतु समाज और पुरुषों की जिम्मेदारी है कि वो सकारात्मक पुरुषत्व की मानसिकता का विकास करें और महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान दे। उन्होंने बालक बालिकाओं से कहा कि मां बाप आपको अपने सपनों को पूरा करने के लिए विश्वास के साथ विद्यालय भेजते है तो उनके विश्वास को हमेशा बनाए रखें और जब तक आप आत्मनिर्भर ना हो जाएं तब तक सिर्फ अपने गुरु और मां बाप को ही अपना आदर्श बनाकर रखें। कार्यक्रम में कालेज प्राचार्य डॉ इशरत खान, पुलिस विभाग से एसआई स्वाति गोदरेज, महिला एवं बाल विकास से संरक्षण अधिकारी श्री राजा वर्मा, कॉलेज के प्राध्यापक और बडी संख्या में बालक-बालिकाएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ वंदना श्रीवास्तव द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।






