नहीं सुधर पा रहा ऐतिहासिक स्थल पर बिजली का ढर्रा ।

नसीमखान
सांची,,, वैसे तो इस स्थल की पहचान विश्व भर मे एक ऐतिहासिक स्थल के रूप में विख्यात है परन्तु इस स्थल की प्रसिद्धि से विद्धुत वितरण कंपनी लिमिटेड पूरी तरह लापरवाह बनी हुई हैं जिसका नतीजा इस स्थल की बिगड़ी बिजली व्यवस्था का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार इस स्थल की पहचान वैसे तो ऐतिहासिक रूप से जानी जाती हैं यहाँ देशविदेश से लोग दर्शनार्थ आते जाते है हालांकि देशविदेश के लोग यहाँ स्थित प्राचीन धरोहरों की प्रशंसा किये बगैर नहीं थकते ।इस तर्ज पर ही विद्धुत नियामक आयोग ने भी इस स्थल पर बिजली चौबीस घंटे व्यवस्थित रहने के निर्देश दिये थे परन्तु नियामक आयोग के निर्देश की तब धज्जियाँ वि वि कं द्वारा उडा दी जब इस स्थल पर बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है तथा घंटों बिजली का कोई अतापता ही रहता है हालांकि वितरण कंपनी द्वारा इस स्थल को चोबीस घंटे बिजली का भरोसा दिलाते हुए पहले डले तार हटा दिये गए बताया जाता है इन तारो का भी किसी को पता नहीं है तथा बिजली व्यवस्था सुचारू बनाने के लिए तार के स्थान पर केवल डाल दी गई थी तथा अधिकारी भरोसा दिलाते नहीं थकते कि केवल डलने के उपरांत अब बिजली व्यवस्था सुचारु बनी रहेगी परन्तु यह भरोसा लोगो का तब टूट गया जब लोगो के घरों में बिजली जलने के पहले ही यह केवल धूधू कर आग की लपटें छोडती जल उठती हैं इन केवल की आग से लोग सुरक्षित नहीं दिखाई देते हैं तथा यह घटिया केवल अपनी घटिया गुणवत्ता की कहानी स्वयं कह उठती हैं तब आसानी से इन बिजली केवल पर कहीं न कहीं सवाल खड़े होने लगते है परन्तु विद्दुत वितरण कंपनी के नीचे से ऊपर तक अधिकारी बेफिक्र बने बैठे हैं कहीं न कहीँ प्रश्न खडे होने लगते है इस स्थल की बिजली व्यवस्था से न तो अधिकारियों को ही फ्रिक है न ही प्रशासन ही इस बिजली व्यवस्था के ढर्रे की ही सुध ले पा रहा है ।इस विख्यात स्थल पर कब बिजली चली जाये कब आये किसी को भी नहीं पता रहता है इस बिजली के बिगड़े ढर्रे से न केवल लोगो की बिजली गुल हो जाती हैं बल्कि लोग गेहूँ पिसवाने से महरुम रह जाते है तथा पेयजलापूर्ति भी पूरी तरह गडबडा जाती हैं इसके साथ ही नगर में बिजली पर निर्भर मोबाइल के नेटवर्क भी पूरी तरह गडबडा जाते है जिससे सरकारी काम तो प्रभावित हो ही जाते है बल्कि बैंकिंग व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा जाती है इतना सब होते हुए भी स्थानीय स्तर पर न तो विद्धुत अधिकारी न ही कर्मचारियों की ही नींद टूट पा रही हैं ।

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