नसीमखान
सांची, ,– विश्वविख्यात बौद्ध स्थल सांची स्तूप परिसर में आज बुद्ध जयंती के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और शांति का अनुपम संगम देखने को मिला। ऐतिहासिक बौद्ध मंदिर परिसर में महाबोधि सोसायटी द्वारा भव्य आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी शामिल हुए।
सांची, जिसे भगवान बुद्ध की पावन धरा माना जाता है, वही स्थान है जहाँ सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के पश्चात शांति का संदेश देते हुए बौद्ध धर्म अपनाया था। यहीं भगवान बुद्ध के परम शिष्य सारिपुत्र और महामोदग्लायन की पवित्र अस्थियाँ भी सुरक्षित रखी गई हैं।
आज सुबह से ही मंदिर परिसर में अनुयायियों का तांता लग गया था। विशेष पूजा-अर्चना, धम्म प्रवचन और बुद्ध वंदना का आयोजन हुआ। इस अवसर पर महाबोधि सोसायटी के प्रभारी सहित कई प्रमुख बौद्ध धर्मगुरुओं एवं भिक्षुओं ने भगवान बुद्ध के जीवन, शिक्षाओं और अहिंसा के मार्ग पर प्रकाश डाला तथा उपस्थित जनसमूह से उनके बताए रास्ते पर चलने का आव्हान किया।
हालांकि, परंपरानुसार प्रतिवर्ष निकाली जाने वाली भव्य शोभायात्रा इस वर्ष अपरिहार्य कारणों से नहीं हो सकी, परंतु श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। नगर भर में बौद्ध अनुयायी बौद्ध ध्वज लिए भ्रमण करते देखे गए, वहीं स्तूप परिसर में स्मारकों का दर्शन और अवलोकन करते श्रद्धालु पूरे वातावरण को शांति और भक्ति से भरते रहे।
आज का दिन न केवल बौद्ध अनुयायियों के लिए, बल्कि समस्त मानवता के लिए शांति, करुणा और सत्य के आदर्शों को स्मरण करने का दिन रहा। सांची एक बार फिर बुद्ध की शिक्षाओं की जीवंत धरा के रूप में स्थापित हुई।






