सांची में बढ़ते मच्छरों से जनजीवन अस्त-व्यस्त, प्रशासन से राहत की दरकार।
नसीमखान
सांची ,,,
गर्मी का मौसम आते ही सांची नगर में मच्छरों का प्रकोप बेकाबू होता जा रहा है। नगरवासियों का जीवन दिन-रात मच्छरों के हमले से प्रभावित हो रहा है। स्थिति यह है कि न दिन में चैन है, न रात में नींद। मच्छरों की भिनभिनाहट अब आम जनजीवन के लिए गंभीर संकट बन चुकी है। इतना ही नहीं इन मच्छरों से छोटे बच्चों के साथ ही नवजात शिशुओं को इनके प्रकोप से बचाव करना मुश्किल हो जाता है
पूर्व में नगर परिषद द्वारा मच्छरों की रोकथाम के लिए नियमित रूप से ब्लिचिंग पाउडर का छिड़काव तथा फॉगिंग मशीन के माध्यम से धुआं छोड़ा जाता था, जिससे इन पर नियंत्रण बना रहता था। लेकिन अब यह व्यवस्था ठप पड़ी है।
हालांकि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत यहां स्वच्छता अभियान के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए, लेकिन मच्छर-जनित स्थलों पर कोई प्रभावी कार्य नहीं हुआ। कई स्थानों पर आज भी जलजमाव, कचरे के ढेर और गंदगी का आलम वैसा ही बना हुआ है, जो मच्छरों के पनपने का मुख्य कारण हैं।
नगर में कई रिक्त प्लॉट जलभराव वाले गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं, जहाँ सुअरों की आवाजाही और गंदगी की भरमार मच्छरों की संख्या को और भी बढ़ा रही है। इस कारण डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों की आशंका गहराती जा रही है। इसके साथ ही नाले नालियों में ठहरे गंदगी भरे पानी भी तादाद बढा रहे हैं ।हालांकि सफाई कर्मी अपने स्तर पर सफाई व्यवस्था बनाने में पीछे नहीं दिखाई देते बावजूद इसके गंदगी खत्म होने का नाम नहीं ले पा रही है जिससे यह समस्या बढती जा रही है
नगरवासियों ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि फौरन नगर में फॉगिंग, छिड़काव और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था कराई जाए, ताकि बढ़ते मच्छरों के प्रकोप पर नियंत्रण पाया जा सके। यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो न सिर्फ नगरवासियों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ेगा, बल्कि सांची जैसे ऐतिहासिक स्थल की साख पर भी आँच आ सकती है।






