नसीमखान
सांची,, जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली लगभग 83 ग्राम पंचायतें सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की अहम जिम्मेदारी निभाती हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इन पंचायतों के अधिकांश सरपंच और सचिव गांवों की बजाय शहरों में रहना अधिक पसंद करते हैं। इसका सीधा असर योजनाओं के क्रियान्वयन और ग्रामीणों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कई पंचायतों में सचिवों की भारी कमी है, जिससे एक-एक सचिव को दो से तीन पंचायतों का कार्यभार संभालना पड़ रहा है। ऐसे में उनकी नियमित उपस्थिति ग्राम मुख्यालय पर सुनिश्चित कर पाना संभव नहीं हो पाता।
सरकार द्वारा बार-बार दिए जाने वाले निर्देशों के बावजूद सरपंच और सचिव ग्राम पंचायत कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते। परिणामस्वरूप ग्रामीण जनता को सरकारी योजनाओं की जानकारी लेने के लिए परेशान होना पड़ता है। कई बार उन्हें जनपद पंचायत के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
बताया जाता है कि अनेक पंचायत ऐसी भी है जिनमें महिला सरपंचों के कामकाज उनके पति अथवा उनके नातेदार सरपंच की भूमिका में दिखाई देते है तथा अनेक सरपंचों की बैठक में भी वह अपनी उपस्थिति दर्ज करा देते है अधिकारी भी उन्हें ही सरपंच मान बैठते है ।बताया जाता हैं कुछ महिला सरपंच ऐसी भी हैं जिन्हें न तो अधिकारी जानते है न ही वह अधिकारियों को जानते है इससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्राम सरकार कैसी चल रही होगी ।
चौंकाने वाली बात यह है कि जनपद पंचायत के अधिकारी भी इस स्थिति से भली-भांति परिचित हैं। जब भी अधिकारियों का निरीक्षण तय होता है, पहले से ही सरपंच-सचिवों को सूचना देकर उन्हें उपस्थित रहने के निर्देश भेज दिए जाते हैं। इससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों की निगरानी भी भगवान भरोसे चल रही है। तकनीकी स्टाफ की पदस्थापना के बावजूद निर्माण कार्यों की निगरानी नहीं हो पाती, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश बढ़ जाती है।
हालांकि कुछ मामलों में सरपंच-सचिवों पर कार्रवाई की गई है, लेकिन वह भी अधिकतर दिखावे तक सीमित रह गई है। मजबूत राजनीतिक या प्रशासनिक पकड़ रखने वाले जिम्मेदार आसानी से जांचों से बच निकलते हैं।
यदि सांची जनपद पंचायत अंतर्गत हो रहे निर्माण कार्यों की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। यह जरूरी हो गया है कि शासन इस मामले को गंभीरता से लेकर प्रभावी कार्रवाई करे, ताकि सरकारी योजनाएं वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकें और ग्रामीणों को उनका लाभ मिल सके।






