नसीमखान
सांची,,
जिस आशंका की लगातार चर्चा हो रही थी, आखिरकार वह सच साबित हो गई। नगर परिषद द्वारा करोड़ों की लागत से किए जा रहे नाला निर्माण कार्य की धीमी गति और लापरवाही ने नगरवासियों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। रविवार को हुई आधे घंटे की तेज बारिश ने नगर में अफरातफरी मचा दी। निर्माण एजेंसी द्वारा खुदाई के बाद सड़क किनारे डाली गई मिट्टी बारिश के चलते दलदल में तब्दील हो गई, जिससे सड़क पर चलना मुश्किल हो गया।
लोगों को मजबूरी में सर्विस रोड छोड़कर तेज रफ्तार वाहनों से भरे राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलना पड़ा, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ गई। यही नहीं, नाले का निर्माण सड़क स्तर से ऊंचा होने के कारण आसपास की दुकानों व घरों में बारिश का पानी भरने की आशंका भी गहरा गई है।
वाटर प्लांट की खुदाई से भी बढ़ी परेशानी
इधर, वाटर प्लांट कंपनी द्वारा पाइपलाइन बिछाने के नाम पर की गई खुदाई से भी सड़कों पर मिट्टी का अंबार लग गया है। पूरी सर्विस रोड दलदली हो चुकी है और आने वाले दिनों में यह स्थिति और विकराल हो सकती है।
राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग की लापरवाही उजागर
इस ऐतिहासिक पर्यटन स्थल की सड़कों की हालत पहले से ही खराब थी। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने करोड़ों रुपए खर्च कर मुख्य सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड और सुरक्षा के लिए लोहे की रेलिंग तो लगाई, पर इनकी देखरेख पूरी तरह से उपेक्षित रही। कई जगह रेलिंग टूट चुकी हैं या अराजक तत्वों द्वारा उखाड़ ली गई हैं, जिससे लाखों की क्षति हुई है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि विभाग अपने ही खर्च से किए गए निर्माण की निगरानी तक नहीं कर रहा। अन्य निर्माण एजेंसियां खुलेआम इन सड़कों की खुदाई करती रहीं, मिट्टी फैलाती रहीं, लेकिन विभाग चुप रहा। इससे सरकार की करोड़ों की राशि व्यर्थ चली गई।
जिम्मेदारों की भूमिका संदेह के घेरे में।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कहीं न कहीं विभागीय अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के बीच मिलीभगत हो सकती है। उच्च स्तरीय जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसकी लापरवाही और मिलीभगत से सरकारी धन की बर्बादी हो रही है।
स्थानीय प्रशासन मौन, जिला प्रशासन से उम्मीद ।
स्थानीय प्रशासन इस गंभीर समस्या पर पूरी तरह मौन नजर आ रहा है। अब जिला प्रशासन को आगे आकर हस्तक्षेप करने की ज़रूरत है ताकि नगरवासियों को राहत मिल सके और इस ऐतिहासिक नगर की छवि धूमिल होने से बचाई जा सके।






